रायगढ़। नईदुनिया प्रतिनिधि

जिला मुख्यालय से पूर्वोत्तर दिशा में 137 किलोमीटर दूर धरमजयगढ़ ब्लाक के ग्राम आमानारा में हिन्दुओं के प्रथम पूज्य गणेश बप्पा के साथ साथ अन्य किसी देवी देवता की प्रतिमा का कभी स्थापना नहीं हुआ है। ना ही इस गांव में रहने वाले इसकी पूजा अर्चना किया यह ताज्जुब का विषय जरूर है।

लेकिन इस पूरे ग्रामवासी पहाड़ी कोरवा बैठक कर सर्वसम्मति से निर्णय लिए हैं कि इस वर्ष गणेश उत्सव मनाया जायेगा। इस निर्णय से ग्रामीण उत्साहित हैं और लोगों के मन में डर भी है कि गांव में कुछ नया कर रहे हैं कहीं कुछ हो तो नहंीं जायेगा। जिस पर ग्राम के कुछ बुजुर्ग ने उन्हें बताया गया कि भगवान की पूजा कर रहे हो तो अच्छा ही होगा। ग्रामीणों के उत्साह का आंकलन इससे किया जा सकता है कि पहुंच विहीन गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए पूरे ग्रामीण सड़क में पत्थर डालकर मरम्मत किये हैं ताकि गणेश जी की मूर्ति सुरक्षित लाया जा सके। बैठक में गांव भर के लोग एकत्रित थे।

आपको शीर्षक पढ़कर अटपटा जरूर लग रहा होगा लेकिन है यह सोलह आना सच है। 1952 में बसा ग्राम जांतानारा जिसे अब आमानारा के नाम से भी जानते हैं। यह गांव चारों तरफ से पहाड़ से घिरा हुआ है। जो टापू नुमा की तरह है।

यह पहाड़ी कोरवा ग्राम आमानारा के ग्रामीण जहां मूलभूत सुविधाओं से वंचित है वही दूसरी इस गांव में पहुंच मार्ग तक नही है। विडंबना यह है कि गांव चारों तरफ से पहाड़ से घिरा हुआ होने के कारण गांव में 108 वे 102 जैसे बुनियादी आपातकाल सुविधा वाले वाहन तक नही आती है। आलम यह है कि लोगो को किसी भी तरह की स्वास्थ्य सम्बधित तकलीफ होती है तो इन पहाड़ी कोरवा द्वारा कंधे पर या फिर साइकिल से स्वास्थ्य केंद्र का रुख करते है। यहां यह बताना लाजमी होगा कि पहाड़ी कोरवा राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र हैं और रामचन्द्र के अनुयायी हैं। ये जनजातीय अपने को हिन्दु तो बताते हैं लेकिन श्रीराम को छोड़ किसी भी देवी देवताओं के विषय में नहीं जानते। पहाड़ी कोरवा विशेष पिछड़ी जनजातीय होने के साथ ही साथ जंगल में ही रहना पसंद करते हैं। इसलिए पुराने लोग अपनी परंपरा के अलावा नया कुछ करना नहीं चाहते। इसी समाज के नये लोग जो कुछ शिक्षित होकर अपने समाज को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं।

दो साल पहले घर वापसी

विगत कई वषोर् पूर्व इन पहाड़ी कोरवाओं का धमार्तरण हुआ था बताया जा रहा है कि इसके पीछे ग्रामीणों को प्रलोभन देकर इनका धर्मान्तरित कराना किया गया था। बहरहाल देर आया दुरूस्त आया के तर्ज पर इन्होंने पुनः हिन्दु धर्म में घर वापसी दो साल हुआ था। पहाड़ी कोरवाओं के राष्ट्रीय संरक्षक प्रबल प्रताप सिंह जुदेव के नेतृत्व में इनका घर वापसी हुआ था। तब से पूरी तरह से हिन्दु धर्म में आस्था व्यक्त करते हुए हिन्दु देवी देवताओं को जानना चाहते हैं।

युवा वर्ग है शिक्षित, रोजगार की टकटकी लगाए

उक्त पहुंच विहीन ग्राम में जहा मूलभूत सुविधाओं का आभाव है वही ग्राम के ग्रामीण युवा से लेकर बच्चे शिक्षा के क्षेत्र में अलख जगा रहे है। आमानारा ग्राम के अधिकांश युवा शिक्षित है जिन्हें प्रशासन से गांव में मूलभूत सुविधाओं व रोजगार की टकटकी लगाए बैठे है। कुछ ग्राम के युवाओं ने चर्चा के दौरान बताया कि गांव में मनरेगा के तहत काम भी नही मिल रहा है। जिसको लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है।

आपातकाल सेवा नादरद, मोटरसाइकिल से मदद

ग्राम आमानारा में पहाड़ी कोरवा मूलभूत सुविधाओं से वंचित है तो इस गांव में पहुच मार्ग तक नही है। विडंबना यह है कि गांव चारों तरफ से पहाड़ से घिरा हुआ है। गांव में 108 वे 112 जैसे बुनियादी वाहन तक रास्ता नही होने से आती है। आलम यह है कि लोगो को किसी भी तरह की स्वास्थ्य सम्बधित तकलीफ होती है तो पहाड़ी कोरवा द्वारा कंधे पर या फिर साइकिल से स्वास्थ्य केंद्र का रुख करते है।

वही गांव में मानवीय संवेदना भी मौजूद है। जिसमें 52 परिवार की आबादी वाले गांव में महज दो मोटरसाइकिल है। यह मोटरसाइकिल जिस व्यक्ति के पास वह ग्राम में हर सुख दुःख में सभी की मदद मोटरसाइकिल को संजीवनी वाहन की तर्ज पर करता। जिसका प्रमाण स्वयं ग्राउंड करने गए हमारे सवांददाता को ग्रामीणों ने दिया है।

प्रधानमंत्री आवास से पूरा ग्राम वंचित

देश मे कोई भी व्यक्ति आवास व कच्चे के मकान में जीवन यापन ना करे इस लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री आवास योजना आरम्भ किया। परंतु यह योजना इस ग्राम के ग्रामीणों को उपलब्ध नही हो सके परन्तु यह गांव इस सुविधा से वंचित है। जिनके द्वारा सकारात्मक सोच रखते हुए देश के प्रधानमंत्री पर भरोषा व आस्था जताते हुए मकान अगर किश्मत में होगा तो जरूर मिलने की बात को दोहरा रहे है।

वर्सन

हमारे गांव में पहली बार गणेश पूजा की जायेगी। जिसके लिए हम युवाओ की टीम लगी हुई है। इसके लिए आपस में आर्थिक सहयोग कर रहे है।

महेश मदुयर, ग्रामीण

वर्सन

गांव में स्कूल बिजली सब है पर गांव सड़क नही है। जिसके लिए कोई भी सुविधा नही मिल पाती है। राशन लेने छह किलोमीटर दूर साजापाली ग्राम जाते है।

रूपमती बाई, ग्रामीण