रायगढ़।नईदुनिया प्रतिनिधि

बिजली बिल हाफ के लिए जिले के आधे लोगों को भी लाभ नहीं मिल रहा है। जिले में करीब 3 लाख उपभोक्ताओ में से औसतन 1 लाख 27 हजार को ही बिजली बिल में छूट का फायदा मिल रहा है। विधानसभा में सीएसपीडीसीएल द्वारा भेजी गई जानकारी के अनुसार इसमें शासन को करीब साढ़े 6 करोड़ का भार उठाना पड़ा है।

किसानों की कर्जमाफी 21 सौ में धान और बिजली बिल हाफ के वादों के साथ सत्ता में आई राज्य सरकार की योजनाओं को लेकर विधानसभा सत्र में सर्वाधिक सवाल लगे हैं। मानसून सत्र में इस बार बिजली बिल हाफ को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा गया है। इसमें सीएसपीडीसीएल ने जो सभी जिलों की जानकारी भेजी है। उसके अनुसार रायगढ़ जिले में कुल उपभोक्ताओं के आधे को भी इस योजना का भी लाभ मिलता नहीं दिख रहा है। जिले में रायगढ़ व सारंगढ़ के तीनों डिविजन को मिलाकर देखें तो यहां पर घरेलू एवं व्यवसायिक मिलाकर कुल 2 लाख 93 हजार 457 उपभोक्ता हैं। इसमें बीपीएल श्रेणी के 1 लाख 27 हजार 279, घरेलू के 1 लाख 18 हजार 826 व 14 हजार 780 व्यवसायिक कनेक्शन दिए गए हैं। इसके अलावा 25 हजार 875 सिंचाई पंप के लिए कनेक्शन दिए गए हैं लेकिन इसमें से बिजली बिल हाफ वाली योजना के लिए औसतन 43 प्रतिशत उपभोक्ताओं को ही फायदा हो पा रहा है। जिले में इस दौरान सीएसपीडीसीएल ने 1 लाख 27 हजार 902 उपभोक्ताओं को इसकी छूट दी है और इस दौरान कुल 6 करोड़ 55 लाख का भार राज्य शासन के खाते में आया है। पूरे प्रदेश में इस योजना से लाभान्वित लोगों पर नजर डाले तो 31लाख 72 हजार 833 उपभोक्ताओं को बिजली बिल हाफ का लाभ मिला है और सरकार को इसके लिए 162 करोड़ से अधिक का वहन करना पड़ा है।

4 महीने में साढ़े करोड़ खर्च

शासन ने मार्च से बिजली बिल हाफ वाली स्कीम लागू की थी। इसमें प्रति माह 400 यूनिट तक की खपत करने पर उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिलना था। 400 से कम खपत होने पर 2.75 रूपये प्रति यूनिट की दर से बिजली बिल की गणना की जा रही है और इससे अधिक होने पर वास्तविक दर 5.30 की दर से बिजली बिल बनाया जा रहा है। इसमें शुरूआती 4 महीनो में रायगढ़ में ही 6 करोड़ 55 लाख रूपये का भार सरकार के खाते में आ गया है।

डेढ़ से दो महीनों में आ रहा बिल

बिजली विभाग के स्पाट बिलिंग शुरू करने के बाद से बिजली बिल हाफ वाली योजना पटरी से उतर गई है। दरअसल जिले में लोगों को हर महीने बिजली बिल नहीं मिल पा रहा है। इसमें मीटर रीडर हर महीने लोगों के घरों में जाकर रीडिंग लेने की जगह डेढ़ से दो महीनों बाद जाकर एकमुश्त बिल थमा दे रहे हैं। जिससे मासिक 400 यूनिट की खपत का दायरा आगे हो जा रहा है। इस वजह से भी आम लोग शासन की इस योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।