रायगढ़ । मनरेगा में सड़क निर्माण में गड़बड़ी के बाद भी भुगतान कर देने के एक मामले में तत्कालीन जनपद सीईओ नेहा सिंह दोषी पाई गई हैं। जिपं सीइओ ने जांच परीक्षण के बाद जनपद पंचायत सीईओ नेहा को तीन दिनों के भीतर 26 हजार रूपये मनरेगा शाखा में जमा करने के आदेश दिए हैं और ऐसा नहीं किए जाने पर एसडीएम सीईओ के खिलाफ रिकवरी केस कायम कर दंडात्मक कार्रवाई करेंगे। नेहा वर्तमान में जांजगीर में पदस्थ हैं। मामले में एसडीएम को भी जवाब देना पड़ेगा।

रायगढ़ जनपद पंचायत में इंदिरा आवास घोटाले के बाद से विवादों में रहने सीईओ नेहा सिंह अपने ट्रांसफर के बाद भी सुर्खियों में आ गई हैं। लगातार विवादों में रहने वाली तत्कालीन सीईओ का वर्तमान में जांजगीर जिले के बलौदा पंचायत में ट्रांसफर हो गया है लेकिन जिपं सीईओ चंदन त्रिपाठी ने उनको एक रिकवरी नोटिस जारी किया है। दरअसल रायगढ़ जनपद पंचायत अंतर्गत लेबड़ा ग्राम पंचायत में मनरेगा से सड़क निर्माण का कार्य स्वीकृत हुआ था। पंचायत के आश्रित गांव चारभाठा में द्वितीय श्रेणी सड़क निर्माण का काम शुरू हुआ था।

सरपंच एवं सचिव की देखरेख में हो रहे इस काम की मानिटरिंग का जिम्मा तत्कालीन जनपद सीईओ नेहा सिंह का था। गांव में आधी-अधूरी सड़क निर्माण के बाद भुगतान हो गया। तो इसके लिए सीईओ को पूर्व में नोटिस दिया गया था लेकिन उन्होंने मनरेगा के तकनीकी सहायक की अनुशंसा व मस्टर रोल भराने के बाद एफटीओ जनरेट हो जाने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया था।

इसके बाद जिपं सीईओ ने दोबारा से फाइल खुलवाकर इसका परीक्षण करवाया और इसमें सीइओ नेहा सिंह को दोषी माना गया है। अब जिपं सीइओ ने तत्कालीन सीईओ नेहा को नोटिस जारी किया है और 26 हजार 230 रूपए की डिफरेंस राशि 3 दिनों के भीतर जमा करने के आदेश दिए हैं। नोटिस में मनरेगा शाखा में उक्त राशि निर्धारित समय में जमा नहीं होने पर एसडीएम के द्वारा रिकवरी केस चलाकर सीइओ से वसूली करने की भी बात कही गई है।