रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में सोमवार को विपक्षी विधायकों ने सरकार पर बदले की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। वे काम रोककर इस मुद्दे पर चर्चा करने की मांग कर रहे थे, लेकिन अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने उनके स्थगन प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। इस पर विपक्षी नारेबाजी करने लगे, जवाब में सत्ता पक्ष के विधायक भी खड़े हो गए।

हंगामा इतना बढ़ा की सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। भोजनावकाश के बाद जब दूसरी बार कार्यवाही शुरू हुई तब भी विपक्षी अड़े रहे और नारेबाजी करते हुए 15 सदस्य गर्भगृह में पहुंच गए। नियमानुसार सभापति ने सभी को निलंबित कर दिया।

विपक्षी सदस्य इसके बाद भी शांत नहीं हुए और गर्भगृह में ही बैठकर नारेबाजी करने लगे। सभापति के आग्रह करने के बाद वे सदन से निकले और विधानसभा परिसर स्थित गांधी प्रतिमा के सामने धरने पर बैठ गए। बाद में संसदीय कार्यमंत्री रविंद्र चौबे से चर्चा के बाद भाजपा विधायकों ने धरना खत्म किया।


प्रश्नकाल खत्म होते ही भाजपा विधायक शिवरतन शर्मा ने यह मामला उठाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों की शह पर पूरे प्रदेश में भाजपा के कार्यकर्ताओं को धमकाया जा रहा है। अजय चंद्राकर ने कहा कि मूल काम छोड़कर आतंक का वातावरण माहौल बनाया जा रहा है।

आतंक के माहौल में हम सदन में अपनी बात कैसे रख सकेंगे। नारायण चंदेल ने कहा कि बदले की भावना से राजनीति शर्मनाक है। बृजमोहन अग्रवाल ने भी स्थगन पर चर्चा की मांग की। इस बीच अध्यक्ष ने स्थगन सूचना को अग्राह किए जाने की जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि इसमें तिथि और घटना का उल्लेख नहीं है। इस पर नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि विपक्ष के सदस्यों को फंसाने के लिए एफआइआर किए जा रहे हैं। चर्चा होगी तो तथ्य रखने का मौका मिलेगा। लेकिन उनका आग्रह स्वीकार नहीं किया गया। विपक्ष के हंगामें की वजह से सदन की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।

स्वमेय निलंबन का नियम

छत्तीसगढ़ विधानसभा में नियम है कि जो भी सदस्य गर्भगृह (वेल) में जाएगा वह स्वमेय निलंबित हो जाएगा।