रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

'बच्चों का मन साफ होता है, जो सोचते हैं उसे पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास निरंतर करते हैं।' देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम के इस सार्थक वाक्य को शहर के एक निजी स्कूल के 15 छात्रों की टोली पूरा कर रही है। गरीब बच्चों की सहायता का सपना लिए ये छात्र अपनी पुरानी यूनिफार्म को बस्तियों में जाकर जरूरतमंद बच्चों में बांट रहे हैं। छात्रों की टीम का मानना है कि जो चीजें हमारे लिए उपयोगी नहीं है, उन्हें फेंकने के बजाए किसी जरूरतमंद को दे दिया जाए तो उसका सही उपयोग होता है।

पुरानी यूनिफार्म बांटने में भी करना पड़ा संघर्ष

कहते हैं कि मुफ्त की चीजें सभी को भाती हैं, लेकिन यहां कहानी उलटी पड़ गई थी। ब्राइटन इंटरनेशनल स्कूल के छात्रों को पुरानी यूनिफार्म को बांटने के लिए भी संघर्ष करना पड़ा। कई संस्थान वृद्घ आश्रम, अनाथालय में जब पुरानी यूनिफार्म बांटने गए, तो छात्रों को वहां से भगा दिया गया। कहा गया कि हमारी संस्था में पुराने कपड़े नहीं लिए जाते। छात्रों की साफ नियत और अच्छे विचार की कद्र नहीं की गई। छात्रों ने बताया, इसके बावजूद हमारा हौसला कम नहीं हुआ। हम रोजाना प्रयास करते रहते। एक दिन हमारा प्रयास पूरा हुआ और हमने पचपेढ़ी नाका के पास की बस्ती में जाकर बच्चों को यूनिफार्म वितरित किए। उसके बाद से हम किसी भी संस्था को यूनिफार्म देने के बजाय प्रतिवर्ष छोटी बस्तियों में जाकर कपड़े बांट देते हैं।

पॉकेट मनी से दिए पेन और पैंसिल

मिशन जिंदगी की टीम के सभी छात्र घर से हर महीने मिलने वाली पॉकेट मनी का कुछ हिस्सा गरीब बच्चों के लिए एकत्रित करते हैं। छात्रों पैसे जुटा कर इससे जरूरतमंद स्कूली छात्रों की पढ़ाई से जुड़ी सामग्री खरीदते हैं। इनमें पेन-पेंसिल और किताबों सहित अन्य शैक्षणिक सामग्री शामिल होती है।

ये हैं 'मिशन जिंदगी' टीम के मेंबर

सुमीन वर्गिस, विशाखा त्रिवेदी, हर्ष कोसरिया, देवांग सिंह,मौलश्री शर्मा, आकृति ठाकुर, सोनिया मोरदिया, धवल नायक, दिनेश चंद्रा, मयंक गोयल, शायन सिद्दिकी, निश्चल शांडिल्य, जयेश वर्मा, स्मृति ठाकुर, तकी महमूद।