रायपुर। एक खाताधारक के खाते से फर्जी हस्ताक्षर करके 18 बार पैसे निकाले गए और इस फर्जी काम में बैंक के कर्मचारियों ने लापरवाही की। हस्ताक्षर का बिना मिलान किए ही हर बार चेक पास किया गया। सेवा में कमी के लिए उपभोक्ता फोरम ने स्टेट बैंक न्यू शांति नगर शाखा को दोषी ठहराया है और उपभोक्ता के 2 लाख 57 हजार 500 रुपए लौटाने के आदेश दिए हैं।

उपभोक्ता महेन्द्र कुमार ठाकुर गीतांजलि नगर का रहने वाला है। उनके खाते से 2008 से 2010 के बीच 18 बार चेक के माध्यम से दो लाख 57 हजार 500 रुपए फर्जी तरीके से निकाला गया। इसकी रिपोर्ट सिविल लाइन थाना में लिखाया गया, जिसका दांडिक प्रकरण मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के अदालत में लंबित है। बैंक के सक्षम अधिकारियों द्वारा खाताधारक के हस्ताक्षर का मिलान नहीं किया गया, जबकि चेक में किए गए हस्ताक्षर और उपभोक्ता के हस्ताक्षर में पर्याप्त अंतर है। शिकायत पर बैंक अधिकारी गोलमाल जवाब देकर बचते रहे और उपभोक्ता को पैसा दिलवाने में टालमटोल करते रहे। उपभोक्ता ने बैंकिंग लोकपाल में भी इसकी शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। तब उपभोक्ता ने जिला उपभोक्ता फोरम में बैंक के खिलाफ परिवाद दायर किया। फोरम ने पाया कि बैंक के अधिकारियों ने हस्ताक्षर मिलान में लापरवाही की है, जबकि हस्ताक्षर में काफी अंतर है। उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष राधाकिशन अग्रवाल ने सेवा में कमी के लिए स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया को जिम्मेदार ठहराया है और उपभोक्ता को 2,57,500 रुपए लौटाने का आदेश पारित किया है।