रायपुर। 5.60 करोड़ के नकली नोट के साथ पकड़े गए दंपती के तार दिल्ली से जुड़े निकले हैं। तफ्तीश में पता चला कि दिल्ली निवासी एक शख्स ने निखिल और उसकी पत्नी पूनम को मल्टीनेशनल कंपनियों के सीएसआर मद के पैसे एनजीओ को दिलाने पर बड़ी कमाई का लालच दिया था। कई कंपनियों और एनजीओ के ब्रोकर्स से डील भी कराई थी।

रायपुर के बड़े होटलों में एनजीओ संचालकों के साथ दंपती की अक्सर बैठक हुआ करती थी। पुलिस को आशंका है कि नकली नोट छापने का आइडिया उसी ने दंपती को दिया था। आशंका है कि उसी के कहने पर मल्टीनेशनल कंपनी के सीएसआर मद की रकम पाने के लिए दंपती ने कई एनजीओ को लाखों का चूना लगाया। वह शख्स भी दंपती के इस काम में संलिप्त हो सकता है।

लिहाजा पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए उस शख्स को घेरे में लेने की तैयारी की है। पुलिस का दावा है कि उस शख्स से पूछताछ में बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल पुलिस ने उसके नाम का खुलासा नहीं किया है। दिल्ली में हैकर्स गिरोह के सदस्यों की तलाश में कैंप कर रही पुलिस टीम को उस शख्स का नाम-पता उपलब्ध कराया गया है ताकि उसे हिरासत में लिया जा सके। इधर नकली नोट से जुड़ी सारी जानकारी मिलने के बाद एनआइए की टीम ने दंपती से जेल में जाकर पूछताछ करने के संकेत दिए हैं।

सीसीटीवी रिकॉर्डिंग से खुलेंगे कई राज

पुलिस सूत्रों ने बताया कि अमलीडीह स्थित रजत प्राइम काम्लेक्स के फ्लैट नंबर 708 में कलर प्रिंटिंग मशीन लगाकर दो-दो हजार के 25 हजार नकली नोट की छपाई दंपती ने महज दस दिनों में की थी। आसपास के फ्लैट में रहने वालों को इसकी भनक तक नहीं लगी। पुलिस ने कई पड़ोसियों से पूछताछ की तो यह जानकारी सामने आई कि पिछले कुछ महीने से दंपती से मिलने कई लोग कार से आते थे। बंद कमरे में उनकी बातचीत होती थी।

लिहाजा दंपती से पिछले एक महीने के भीतर कौन-कौन मिलकर गया, वहां लगे सीसीटीवी कैमरे की रिकॉर्डिंग देखने से साफ हो सकेगा। पुलिस ने रिकॉर्डिंग लेकर देखना शुरू कर दिया है। जिन होटलों में दंपती ने बैठक की, वहां की भी वीडियो रिकॉर्डिंग मांगी गई है। अफसरों को उम्मीद है कि इससे कई राज खुलेंगे।

कॉल डिटेल में कई नंबर संदेहास्पद

पुलिस ने दंपती से दो मोबाइल जब्त किया है। दोनों के कॉल डिटेल खंगालने पर करीब बीस से अधिक अन्य राज्यों के नंबर पर पिछले कई महीने से लगातार बातचीत होने का पता चला है। पुलिस की साइबर टीम उन नंबरों को शार्ट लिस्ट कर उनके धारकों की तलाश कर रही है।

नोटो का वीडियो दिखाकर देते थे झांसा

सूत्रों ने बताया कि सीएसआर फंड आवंटित करने वाली बड़ी कंपनियों को दंपती यह आफर देती थी कि उनके पास कई रजिस्टर्ड एनजीओ हैं। उन्हें सीएसआर का फंड देने के एवज में 20 फीसद रकम रखकर 80 प्रतिशत रकम कैश में वापस कर देंगे। कंपनियों को यकीन दिलाने के लिए नकली नोटों का वीडियो दिखाते थे। कंपनियों के ब्रोकर्स अपना शक दूर करने के लिए दंपती को एक पांच सौ का असली नोट देकर यह कहते थे कि आपके पास जितना कैश है उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग हमारे नोट को दिखाते हुए करके दें, तब भरोसा होगा। दंपती इसी नोट का वीडियो दिखाकर ब्रोकर्स को झांसे में लेकर फंड हासिल कर लेते थे।

दो नंबर का पैसा सफेद करने का देते थे लालच

दंपती कंपनियों को यह सब्जबाग दिखाते कि आपके दो नंबर के पैसे को वाइट मनी करके देंगे। इसका इनकम टैक्स रिबेट भी मिलेगा। लिहाजा इस लुभावने आफर में कई कंपनियां फंस जातीं थी। दंपती ने कबूल किया है कि दस से अधिक कंपनियों ने उनसे संपर्क साधा था। पुलिस ने उन सभी कंपनियों की जानकारी हासिल कर ली है। अब कंपनी से जुड़े ब्रोकर, संचालकों से भी पूछताछ की जाएगी। आशंका है कि ब्रोकर्स ने दो नंबर के पैसों को एक नंबर (सफेद) करने के चक्कर में नकली नोट बाजार में खपाए हैं।

संस्था संचालक ने कबूला हुई थी डिलिंग, नोट भी दिखाया था

दंपती से संपर्क रखने वाले धमतरी जिले के ग्रामीण श्री मैत्री सेवा संस्थान के संचालक मनोज साहू से पुलिस ने दो घंटे पूछताछ की। उसने बताया कि दो महीने पहले एक परिचित के जरिए उसकी निखिल व पूनम से मुलाकात हुई थी। दंपती ने राजनांदगांव की कंपनी के सीएसआर मद से 5 करोड़ रुपये दिलाने को कहा था। इसके एवज में निखिल ने 20 फीसद कमीशन की मांग की थी।

महीने भर पहले दोनों के बीच सौदा तय हो गया था। इसके बाद से कंपनी प्रबंधन से निखिल की बातचीत चल रही थी। दिल्ली के एक एनजीओ से भी वह बातचीत कर रहा था। इस बीच फ्लैट ले जाकर निखिल ने नकली नोट का जखीरा भी दिखाया था। यह देखकर मनोज डर गया था। पुलिस ने मनोज से पिछले आठ साल में संस्था को प्राप्त फंडिंग और संस्था से संबंधित सारे दस्तावेज मांगे हैं। तीन और ऐसी संस्थाओं के संचालकों को भी तलब किया गया है।