विनोद सिंह, जगदलपुर। पड़ोसी राज्य आंध्रप्रदेश में गोदावरी नदी पर निर्माणाधीन पोलावरम अंतरराज्यीय बहुउद्देशीय राष्ट्रीय परियोजना के डूबान से छत्तीसगढ़ के अंतिम छोर पर बसे कोंटा नगर की आधे हिस्से की जलसमाधि बन जाएगी। डूबान पोलावरम बांध के पानी से नहीं बल्कि गोदावरी की सहायक नदी सबरी और इसके 16 सहायक नालों में आने वाले बैक वॉटर से होगा।

यही हाल पड़ोसी राज्य ओडिशा के मलकानगिरी जिले में सिलेरू नदी के बैक वॉटर से भी होगा। विदित हो कि दोनों राज्यों ने सर्वोच्च न्यायालय में पोलावरम परियोजना के डूबान से अपने-अपने राज्यों को बचाने की गुहार लगाते याचिकाएं लगा रखी हैं।

कोंटा से 130 किमी नीचे की ओर गोदावरी नदी पर पापीकुंडलू क्षेत्र में पोलावरम परियोजना का निर्माण काफी तेजी से चल रहा है। यह परियोजना केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी नदी जोड़ो योजना में शामिल है, इसलिए यहां विरोध भी शायद ही काम आएगा। पोलावरम से छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में पड़ने वाले प्रभाव के अध्ययन रिपोर्ट में यह बात निकलकर सामने आई है।

सर्वेक्षण के आधार पर डूबान प्रभावित कोंटा क्षेत्र में जल संसाधन विभाग ने मुनारा भी गाड़ दिया गया है। छत्तीसगढ़ शासन ने पोलावरम से संभावित नुकसान का आंकलन करने हाल ही रायपुर की एक निजी कंपनी नानक इंफास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड बिलासपुर से पौने तीन करोड़ रुपये खर्च कर सर्वेक्षण कराया है। सर्वेक्षण रिपोर्ट राज्य शासन को भेज दी गई है।

रिपोर्ट में नौ बसाहट क्षेत्र के 382 मकान, चार कुआं, छह ट्यूबवेल और 68 हजार 596 पेड़ों की जलसमाधि की आशंका जताई गई है। इसमें अकेले 335 मकान कोंटा नगर पंचायत के अंतर्गत हैं। वेंकटापुरम के 16 और ढ़ोढरा के 31 मकान भी डूबेंगें इसके साथ ही सरकारी और निजी भूमि को मिलाकर इलाके की 1240 हेक्टेयर जमीन के डूबने की बात कही गई है।


किस गांव की कितनी भूमि और पेड़ डूबेंगे

1- कोंटा- 295.011 हेक्टेयर भूमि, 335 मकान, चार कुएं, छह टयूबवेल, 1859 वृक्ष।

2- वेंकटपुरम- 49.766 हेक्टेयर भूमि, 16 मकान, 61580 नीलगिरी के वृक्ष।

3- ढ़ोढरा- 187.847 हेक्टेयर भूमि, 31 मकान, 4387 वृक्ष।

4- फंदीगुड़ा- 287.464 हेक्टेयर भूमि, 640 वृक्ष।

5- इंजरम- 116.177 हेक्टेयर भूमि, 54 वृक्ष।

6- आसीरगुड़ा- 6.055 हेक्टेयर भूमि।

7- पेदाकिसोली 31.663 हेक्टेयर भूमि, 14 वृक्ष।

8- मेटागुड़ा- 89.525 हेक्टेयर भूमि, 62 वृक्ष।

9 बंजामगुड़ा- 175.858 हेक्टेयर भूमि


तटबंध बनने से बदल जाएगा राज्य का नक्शा

गोदावरी नदी जल विवाद अभिकरण द्वारा पारित अवार्ड जुलाई 1980 के अनुसार पोलावरम बांध के निर्माण से सुकमा जिले के कोंटा तहसील में बैक वॉटर सहित डूबान का अधिकतम जलस्तर आरएल 150 फीट रखनें पर सहमति हुई थी।

अवार्ड में कहा गया है कि आरएल 150 फीट के ऊपर स्थित समस्त भवनों, भूमि, का मुबावजा भुगतान, तथा विस्थापितों का पुनर्वास उसी प्रकार किया जाएगा जैसा आरएल 150 फीट के नीचे आने वाले डूबान क्षेत्र के लिए किया जाएगा अथवा आरएल 150 फीट के ऊपर संभावित डूबान क्षेत्र के लिए आंध्रप्रदेश राज्य स्वयं के व्यय पर आवश्यक सुरक्षात्मक तटबंधों का निर्माण एवं रखरखाव पर्याप्त पंप सहित करेगा।

उल्लेखनीय है कि यदि सबरी नदी के दोनों ओर तटबंध निर्माण जिसकी उंचाई 29 किलोमीटर और उंचाई आठ से दस मीटर तक रखे जाने का प्रस्ताव है छत्तीसगढ़ राज्य की 13 सौ एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी। भूमि के उपयोग से छत्तीसगढ़ राज्य का नक्शा बदल जाएगा।


कोंटा को उद्योग नगरी बनाने का सपना टूट जाएगा

पोलावरम के डूबान को लेकर नए सर्वे में आए आंकड़ों पर गौर करने से साफ है कि प्रदेश के उद्योग मंत्री कवासी लखमा जो कोंटा क्षेत्र के विधायक हैं का कोंटा को उद्योग नगरी बनानें का सपना चकनाचूर हो जाएगा। विदित हो कि अविभाजित मध्यप्रदेश के समय तत्कालीन जनता पार्टी की सरकार ने सात अगस्त 1978 को पोलावरम परियोजना के लिए समझौता किया था।

समझौते में अधिकतम डूबान कोंटा क्षेत्र में आरएल 150 फीट रखने की बात थी लेकिन बांध की मौजूदा ड्राइंग-डिजाइन के अनुसार अधिकतम डूबान आरएल 177.44 फीट तक जा रहा है।

इनका कहना है

पोलावरम के डूबान से कोंटा क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभाव के आंकलन के लिए निजी कंपनी के साथ मिलकर जल संसाधन विभाग ने सर्वे कराया है। रिपोर्ट छग शासन को भेज दी गई है। डूबान से कोंटा को सबसे ज्यादा नुकसान की आशंका है।

जयंत कुमार लकड़ा, कार्यपालन यंत्री जल संसाधन संभाग सुकमा छत्तीसगढ़