रायपुर। शोले की फिल्म तो आपने खूब देखी होगी। जय और वीरू की किस्से भी आपने जरूर देखे हैं। दोनों की दोस्ती ऐसी मिसाल की जीना और मरना एक साथ। कुछ यही हाल पपीता और भुट्टे का है। जी हां, पपीता में लगने वाली बीमारी को भुट्टा रोकता है। इसके साथ पपीते के उत्पादन को दुगना कर देता है।

सुनकर आपको आश्चर्य लग रहा होगा लेकिन ये सच है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. जीडी साहू ने ऐसा ही अनोखी विधि तैयार की है। उनका कहना है कि आप यदि पपीते की खेती कर रहे हैं तो उसकी बीमारी से सजग रहने की जरूरत है।

इसके लिए आपको दवाइयां डालने की जरूरत नहीं बस पपीते वाले खेत की पहली और अंतिम पंक्ति में भुट्टे की फसल लगा दें। इसका फायदा ये होगा कि पपीते में लगने वाले पीला सीरा रोग को भुट्टा खत्म कर देगा। इससे पपीते की पत्तियां का अंकूरण अधिक होगा और फसल का उत्पादन दोगुना होगा।

क्या है पीला सीरा की बीमारी

समान्यत: पपीते के पौधे में पीला सीरा की बीमारी होती है। इसमें पौधे की लगभग सभी पत्तियां पीली होकर झड़ जाती हैं। पौधे का विकास नहीं होता है। इसे पपीते की अच्छी फसल नहीं ली जा सकती। इस बीमारी की तीव्रता इतनी अधिक होती है कि धीरे-धीरे पूरी फसल को चौपट कर देती है। पपीते के फल भी झड़ने लगते हैं।

कैसे बचाता है पीला सीरा रोग से भुट्टा

भुट्टा की फसल लगाने से उसकी पत्तियों से गंध निकलती है जो पीला सीरा रोग के कीटाणु को फसल तक पहुंचने से रोकती है। ऐसे में पपीते की फसल में पहली और अंतिम पंक्ति पर भुट्टा लगाने पर पीला सीरा रोग पपीते के पौधे तक नहीं पहुंचता। पपीते की पत्तियां सुरक्षित रहती हैं। फसल का दोगुना उत्पादन संभव हो जाता है।

आधे एकड़ के लिए दो भुट्टे की पंक्ति

डॉ. साहू ने बताया कि यदि पपीता की फसल का रकबा आधे एकड़ का है तो भुट्टे की पहली और अंतिम में दो पंक्ति हो। वहीं रकबा 10 एकड़ या फिर उससे भी ज्यादा है तो बीच-बीच में भी भुट्टे की पंक्ति लगाना आवश्यक है। इसके अलावा सदैव हर पपीते की फसल की पहली और अंतिम पंक्ति में भुट्टा सबसे ज्यादा जरूरी हैं।