रायपुर। केन्द्र सरकार ने आर्थिक रूप से गरीब परिवारों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का सात जनवरी को राज्यों को निर्देश दिया। छत्तीसग़ढ़ दो महीने बाद तक केवल आरक्षण के लिए कमेटी गठित कर पाया है। केन्द्र सरकार ने सात जनवरी को आर्थिक रूप से गरीब परीवार को सरकारी नौकरी, कॉलेज और विश्वविद्यालय में होने वाली प्रवेश परीक्षाओं में 10 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की थी।

वहीं 14 जनवरी को गुजरात ने आरक्षण लागू कर देश का पहला आर्थिक गरीबों का आरक्षण (ईडब्ल्यूएस) देने वाला राज्य बन गया। प्रदेश सरकार ने केन्द्र सरकार के निर्देश पर राज्य सरकार के आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की कमेटी का गठन का दो महीने बाद केवल कमेटी गठित की।

लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगने के कारण अब सात जनवरी के बाद निकले पदों की परीक्षा देने वाले आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के अभ्यर्थियों का इसका लाभ राज्य में नहीं मिलेगा।

गौरतलब बात ये है कि केन्द्र सरकार के आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए लागू आरक्षण को गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, झारखंड, बिहार, असम, हिमाचल प्रदेश ने लोकसभा की आचार संहिता लगने से पहले ही लागू कर दिया। इससे प्रदेश में आर्थिक रूप से पिछड़े परिवार वालों को आरक्षण के लिए तीन से चार महीने का इंतजार करना पड़ सकता है।

व्यापमं की इन परीक्षाओं में नहीं लागू होगा आरक्षण

व्यापमं ने कार्यालय प्रमुख अभियंता, जल संसाधन विभाग के चार पद, सहायक संचालक खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड सात पद, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के पटवारी के 250 पद और संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं के 21 पदों और प्रदेश में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रवेश परीक्षा में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के 10 प्रतिशत का आरक्षण लाभ नहीं मिल पाएगा। इन परीक्षाओं में पीईटी, पीएटी, पीपीएचटी, बीएससी नर्सिंग, एमएससी नर्सिंग, एमसीए जैसी परीक्षाओं में गरीब परीवार के बच्चों को लाभ नहीं मिलेगा।

पीएससी के इन पदों की होने वाली भर्ती पर नहीं मिलेगा लाभ

प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, सहायक संचालक, सिविल जज जैसे कुल 1452 पदों की भर्ती में आर्थिक रूप से पिछड़े परिवार को लाभ नहीं मिलेगा।

- राज्य लोकसेवा आयोग सरकार के दिशा-निर्देश पर ही कार्य करता है। आरक्षण के संबंध में किसी भी प्रकार की जानकारी नहीं है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन ने कोई आदेश जारी नहीं किए हैं। - आर. पिस्दा, आइएएस, चेयरमैन, सीजी पीएससी