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    पांचवीं सदी के बाद अबूझमाड़ का सर्वे शुरू हुआ तो कटने लगे जंगल

    Published: Fri, 12 Jan 2018 10:28 PM (IST) | Updated: Sat, 13 Jan 2018 08:31 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    अनिल मिश्रा, रायपुर। अबूझमाड़ का राजस्व सर्वे शुरू होते ही अंदरूनी गांवों में जंगलों पर कुल्हाड़ी चलने लगी है। अबूझमाड़ में काम करने वाले कुछ एनजीओ ने नईदुनिया को पेड़ कटने की एक्सक्लूसिव तस्वीरें मुहैया कराई हैं और बताया है कि माड़ के अंदरूनी इलाकों में सर्वे टीम पहुंच पाएगी या नहीं यह कहना अभी मुश्किल है, जबकि जंगल कटने लगे हैं।

    राजस्व विभाग का कहना है कि अगर जंगल कट रहे तो वन विभाग को देखना चाहिए। हमारा काम तो सर्वे करना भर है। हालांकि सर्वे का काम भी साल भर में बाहरी इलाके के दस गांवों का ही हो पाया है। अबूझमाड़ के जंगलों तक अभी सर्वे टीम नहीं पहुंच पाई है।

    यह है अबूझमाड़

    चार हजार वर्ग किलोमीटर के दायरे में बसे अबूझमाड़ में 237 गांव हैं। इसका दायरा नारायणपुर, दंतेवाड़ा और बीजापुर जिले की सीमा तक है। माड़ के गांवों की सरहद का निर्धारण आज तक नहीं हो पाया है। मुगलकाल में अकबर के समय माड़ का सर्वे करने की कोशिश की गई जो सफल नहीं हुई।

    अंग्रेज सरकार ने लगान वसूली के लिए 1909 में सर्वे शुरू किया लेकिन अबूझमाड़ की भौगोलिक परिस्थितियां ऐसी हैं कि सर्वे टीम अंदर तक घुस ही नहीं पाई। अबूझमाड़ में संरक्षित माड़िया जनजाति के करीब 35 हजार लोग रहते हैं, जो आज भी आदिम युग में जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

    1980 में एक मीडिया संस्थान ने अबूझमाड़ के घोटुल (माड़िया जनजाति के युवक-युवतियों के आमोद-प्रमोद का स्थल) पर एक डॉक्यूमेंट्री बनाई थी। इसमें पुरुषों और महिलाओं को नग्न दिखाया गया था। इसे लेकर दुनिया भर में जमकर प्रतिक्रिया हुई। इसके बाद सरकार ने माड़ में बाहरी लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था।

    2009 से हो रही सर्वे की कोशिश

    2009 में छत्तीसगढ़ सरकार ने माड़ में प्रवेश से प्रतिबंध हटाया और राजस्व सर्वे की पहल शुरू की। यह इलाका पूरी तरह नक्सलियों के कब्जे में है। ऊंचे पहाड़ों, नदी-नालों और घने जंगलों से आच्छादित अबूझमाड़ में जमीन का रिकार्ड न होने से जिसके कब्जे में जो जमीन है वह उसकी है। यानी जिसकी लाठी उसकी भैंस। नक्सल विरोध के चलते 2011 में सर्वे बंद करना पड़ा। 2016 में राज्य सरकार ने आईआईटी रूड़की के सहयोग से माड़ का एरियल सर्वे कराया। अब लोगों के जमीन के निर्धारण के लिए राजस्व अमले को मौके पर पहुंचकर जमीन की नाप करनी है।

    कुछ पेड़ कटे हैं- कलेक्टर

    नारायणपुर के कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने बताया कि माड़ के 10 गांवों का सर्वे हो चुका है। अब गावों की बाउंड्री बनाने का काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस की सुरक्षा में धीरे-धीरे अंदर भी घुसेंगे। कुछ गांवों में कुछ पेड़ भी कटे हैं लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि बड़े पैमाने पर कटाई हो रही है। वर्मा ने बताया कि आकाबेड़ा, कुंडला, बासेन, कुरूसनार, सोनपुर आदि ऐसे इलाके जहां पुलिस के कैंप हैं वहां सर्वे कर लिया गया है। ओरछा ब्लॉक मुख्यालय का सर्वे अभी चल रहा है। अबूझमाड़ के अलावा नारायणपुर ब्लॉक के 17 गांवों का भी सर्वे किया गया है।

    इनका कहना है

    पॉयलट प्रोजेक्ट के तहत 10 गांवों में काम किया गया है। चरणबद्व रूप से अंदर घुसेंगे। जितनी सुरक्षा मिलेगी उतना काम होगा। माड़ का सर्वे इस बार हो जाएगा।

    -एनके खाखा, सचिव, राजस्व विभाग

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