रायपुर। छत्तीसगढ़ में आदिवासी विधायकों की समाज में दिए जा रहे योगदान और उनकी भूमिका से आदिवासी समाज नाखुश है। दो दिवसीय कार्यशाल में शामिल होने राजधानी पहुंचे ज्यादातर समाज प्रमुख निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से नाराज नजर आए।

कार्यशाला में भी उन्हें आमंत्रित किया गया था, लेकिन सत्ता या विपक्ष किसी भी तरफ का कोई विधायक नहीं पहुंचा। इससे नाराज आदिवासी नेताओं ने यहां तक कह दिया कि जब वे समाज के किसी काम नहीं आ रहे हैं तो उनका बहिष्कार कर दिया जाना चाहिए। उन्हें न तो किसी कार्यक्रम में बुलाना चाहिए और न ही उनके आमंत्रण पर जाना चाहिए।

रायपुर के पं. रविशंकर विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित इस कार्यशाला के संबंध में सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष बीपीएस नेताम ने बताया कि कार्यशाला में प्रदेशभर से समाज प्रमुख आए हैं। इसमें समाज के विधायकों को भी बुलाया गया था। कार्यशाला के पहले दिन शनिवार को कोई भी विधायक नहीं पहुंचा। उन्होंने बताया कि समाज की बैठक में उनकी भूमिका पर गंभीरता से चर्चा की गई।

ज्यादातर लोगों की राय थी कि अगर विधायक आदिवासी हितों के लिए आवाज उठाते तो फिर हमें सड़क पर क्यों आना पड़ता। इसी वजह से आने वाले समय में उन्हें सामाजिक कार्यक्रमों में आमंत्रण भेजा जाए या नहीं इसको लेकर भी चर्चा हुई।