रायपुर। पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह के दामाद और वर्तमान में अंतागढ़ टेपकांड से सुर्खियों में आए डॉ. पुनीत गुप्ता का इस्तीफा सरकार नामंजूर कर सकती है। इसकी बड़ी वजह है शासन का वह नियम, जिसके तहत नो ड्यूज अनिवार्य है।

पं. जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल मेडिकल कॉलेज रायपुर में ओएसडी नियुक्त किए गए डॉ. गुप्ता ने इस्तीफे के साथ नो-ड्यूज जमा ही नहीं किया था। चार फरवरी को वे मेडिकल कॉलेज पहुंचे। इस्तीफा दिया और चले गए। उनके इस्तीफे को कॉलेज डीन डॉ. आभा सिंह ने सीधे चिकित्सा शिक्षा संचालनालय को भेज दिया। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक संचालनालय यह इस्तीफा शासन को आगे नहीं बढ़ा रहा है। वह डीन से सवाल पूछने जा रहा है कि नो ड्यूज कहां है?

'नईदुनिया" ने शासन के नियमों को लेकर जानकारी जुटाई। वर्तमान में कई विभागों के स्थापना शाखा प्रभारियों से बात की। उनका कहना है कि नो ड्यूज के बिना इस्तीके का मतलब ही नहीं है। नो ड्यूज के मायने होते हैं कि संबंधित शासकीय कर्मचारी द्वारा किसी भी प्रकार की कोई बकाया राशि तो नहीं, पुरानी कोई जांच लंबित तो नहीं। शासकीय कर्मचारी को अपने विभाग के शीर्ष अधिकारी से नो ड्यूज पर साइन लेकर उसे जमा करना होता है।

इधर सवाल कॉलेज स्टाफ पर भी है कि इस्तीफे के साथ नो ड्यूज क्यों नहीं मांगा? डीन ने बगैर नो ड्यूज के उसे संचालनालय आगे क्यों और कैसे बढ़ाया? संचालनालय के अफसर इस पर ऑन रिकॉर्ड कुछ बोलने को तैयार नहीं है।

यह भी है वजह

सूत्र यह भी बताते हैं कि डीकेएस सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में हुई खरीदी, रिनोवेशन में हुए खर्च और आउटसोर्सिंग के जरिए एजेंसियों को नियम-विरुद्ध काम दिए जाने को लेकर भी शिकायतें शासन तक पहुंची हैं। कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता पहले ही कह चुके हैं जांच होनी चाहिए, तब तक पासपोर्ट जब्त होना चाहिए और डॉ. पुनीत गुप्ता के राज्य से बाहर जाने पर प्रतिबंध लगना चाहिए।

पूरा घटनाक्रम

21 जनवरी- डॉ. पुनीत गुप्ता को दाऊ कल्याण सिंह (डीकेएस) सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के अधीक्षक पद से हटा दिया गया था। उनकी जगह पर राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज के एनेस्थिसिया विभाग के प्रोफेसर डॉ. केके सहारे को अधीक्षक बनाया गया। डॉ. गुप्ता को पं. जेएनएम मेडिकल कॉलेज में ओएसडी नियुक्त किया गया।

22 जनवरी- डॉ. गुप्ता ने मेडिकल कॉलेज में बतौर ओएसडी जॉइनिंग दी। सात दिन की छुट्टी पर चले गए।

04 फरवरी- मेडिकल कॉलेज खुलते ही डॉ. गुप्ता पहुंचे, आवक-जावक में इस्तीफा देकर चले गए। उन्हें शासन के बैंक खाते में 1.72 लाख रु. (एक माह का वेतन) जमा किया था। इसके एक दिन पूर्व ही उनके विरुद्ध पंडरी थाना में अंतागढ़ टेपकांड में एफआइआर दर्ज हुई।