रायपुर। अगर आपको पैरों को आपस में क्रास करके बैठने की आदत है तो इसे बदल डालें। यह आर्थराइटिस बीमारी की तरफ आपको ले जा सकती है। अगर लंबे समय तक आप गाल में हाथ रखकर बैठते हैं तो यह भी आपकी मांसपेसियों को नुकसान पहुंचा सकती है। इन सबको मास्कूलो एस्केलेटन डिस्ऑर्डर इन आयुर्वेद (अस्थि संधिगत व्याधि) में शामिल किया गया है। हालांकि आप छोटी-छोटी सावधानियों एवं सतर्कता से इन बीमारियों से बच सकते हैं।

क्या होता है अर्थराइटिस-

आर्थराइटिस जोड़ों के ऊतकों को पहुंचने वाले नुकसान के कारण होता है। इसके कारण ऊतक लाल, गर्म, दर्दनाक और सूज जाते हैं। जोड़ वह जगह होती है जहां पर दो हड्डियां मिलती हैं। जैसे कोहनी या घुटना। कुछ तरह के आर्थराइटिस में जोड़ों का काफी नुकसान होता है।

लक्षण-

बुखार आना है, मांसपेशियों में दर्द, थकान और बदन टूटने जैसा महसूस होना, भूख कम लगना और वजन का तेजी से घटना। शरीर के तमाम जोड़ों में इतना दर्द होता है कि मरीज चीख उठता है। खासकर सुबह के समय। इसके अलावा शरीर गर्म हो जाता है, लाल चकते पड़ जाते हैं और जलन की शिकायत भी होती है। मौजूदा समय में कुछ जांचों के जरिए इस बीमारी का पता लगाया जा सकता है।

गौरतलब है कि शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय में भारत सरकार एवं राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ द्वारा काय चिकित्सा विषय पर छह दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन सोमवार को किया गया। इसमें 16 राज्यों के 30 प्रशिक्षणार्थी एवं 12 विशेषज्ञ अतिथि काय चिकित्सा विषय पर व्याख्यान देंगे।

10 जून को आयुर्वेद मेडिकल महाविद्यालय सांगली महाराष्ट्र के डॉ. एसएन ओझा ने 'हृदय रोग में आयुर्वेद का योगदान' के साथ ही अस्थि संधिगत व्याधि' पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने यहां मौजूद डॉक्टर, प्रोफेसर, छात्रों को बताया कि कैसे हम गाहे-बगाहे बीमारियों का शिकार बनते हैं।

उन्होंने कहा हम अपनी कुछ आदतों को बदलकर हमेशा स्वस्थ रह सकते हैं। वे बताते हैं कि आयुर्वेद में हर बीमारी का इलाज है। कॉर्डियक अरेस्ट, हार्ट अटैक के इमरजेंसी केस में आपको ऐलोपैथी डॉक्टर के पास ही जाना होगा, मगर यह बीमारी न हो इसके लिए आयुर्वेद में दवाइयां हैं।

रायपुर के चिकित्सक डॉ. अजय सहाय ने 'विभिन्न व्याधियों में आवश्यक पैथोलॉजी व रेडियोलॉजी परीक्षण एवं रेफरल कब और कहां?' विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि अगर बीमारी का संपूर्ण इलाज चाहते हैं तो सही डायग्नोस भी होना चाहिए। कार्यशाला की कॉर्डिनेट एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अरूणा ओझा हैं।