रायपुर (राज्य ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य और केंद्र के बीच कार्रवाई को लेकर सामान्य रजामंदी का फैसला वापस लेने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। सीबीआई अब राज्य सरकार की इजाजत या फिर कोर्ट की इजाजत से ही छत्तीसगढ़ में दाखिल हो पाएगी। सरकार ने डीएसपीई अधिनियम 1946 की धारा-6 के तहत दी गई शक्ति का इस्तेमाल कर अपनी रजामंदी को वापस ले रही है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्वीट कर लिखा है कि पिछले कुछ महीनों में केंद्र की एनडीए सरकार ने सीबीआई की विश्वसनीयता को संकट में डाल दिया है। इसलिए अब यह ठीक नहीं लगता कि सीबीआई को हम अपने राज्य में मनमर्जी की कार्रवाई करने की छूट दें।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रमन के बयान पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि जिसे मौत का भय नहीं, वो सीबीआई से क्या डरेगा? बघेल ने कहा है कि आज भाजपा भले ही सीबीआई को रोकने के फैसले को लेकर सवाल उठा रही है, लेकिन हकीकत ये है कि खुद भाजपा सरकार ने ही अपने कार्यकाल में इसका विरोध किया था। 2001 में एसीएस विजयवर्गीय ने सीबीआई को सामान्य रजामंदी की अनुमति दी थी, लेकिन भाजपा शासनकाल में 2012 में गृह विभाग के ओएसडी अशोक जुनेजा ने अपनी असहमति जताते हुए छत्तीसगढ़ में गजट का नोटिफिकेशन कराया था, लेकिन भारत सरकार में गजट का नोटिफिकेशन नहीं हो पाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार विधिवत भारत सरकार में गजट नोटिफिकेशन की कार्रवाई कर रही है, तो उसमें भाजपा वाले एतराज जता रहे हैं।


सीबीआई की कार्रवाई से मुख्यमंत्री के अंदर खौफ- डॉ रमन

सरकार के इस फैसले पर पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने निशाना साधा है। डॉ. रमन ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का बयान अपने आप में यह प्रदर्शित करता है कि वो सीबीआई से कितना डरे हुए हैं। सीबीआई की कार्रवाई के बाद अंदर ही अंदर खौफ है। सीबीआई का नाम सुनकर रात हो या दिन में उन्हें सीबीआई का ही ख्याल आता है। उसे स्टेट में घुसने से प्रतिबंधित कर रहे हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक का कहना है कि वास्तव में संवैधानिक ढांचे का सम्मान करना चाहिए। राज्य सरकार को बड़ा मन बनाकर काम करने की जरूरत है।