रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

पिछले कई सालों से लगातार सुस्त चल रहे रियल इस्टेट मार्केट को उठाने की कवायद शुरू हो गई है। अगले महीने पांच जुलाई को पूर्णकालिक बजट आने वाला है और इसे लेकर कारोबारियों की भी उम्मीदें बढ़ गई हैं। रियल इस्टेट कारोबारी चाहते हैं कि प्रॉपर्टी मार्केट को उठाना है तो इसके लिए कई जरूरी कदम उठाने होंगे। इनमें सबसे जरूरी है कि हाउसिंग प्रॉपर्टी के किराए से होने वाली आय में छूट। इसमें अगर आने वाले कुछ सालों तक छूट मिल जाए तो रियल इस्टेट कारोबार की रफ्तार तेज होगी। साथ ही ही घरों का निर्माण होने से ग्राहकों को भी सस्ती दरों पर मकान मिलेंगे।

प्रमुख रूप से जीएसटी के दायरे में ही रजिस्ट्री को लाया जाए। इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा मिलने लग जाए। इससे रियल इस्टेट को बहुत राहत मिलेगी। इन दिनों रियल इस्टेट में फंडिंग के लिए कोई भी बैंक आसानी से तैयार नहीं हो रही, इसलिए फंडिंग जल्द से जल्द की कोशिश हो। आयकर की धारा 80आइबी को लागू हो जाना चाहिए। इससे फायदा होगा। क्रेडाई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद सिंघानिया का कहना है कि इन दिनों रियल इस्टेट सेक्टर में एक बड़ी समस्या फंडिंग की भी आ रही है। इसमें सुधार होना जरूरी है। साथ ही अगर इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलना इस सेक्टर के लिए काफी फायदे वाला रहेगा।

अप्रैल से कम हुई है जीएसटी की दरें-

जीएसटी काउंसिल पहले ही अफोर्डेबल हाउसिंग के तहत बनाए जा रहे नए प्रोजेक्ट्स पर जीएसटी की दर 5% से घटाकर 1% कर चुकी है। नॉन-अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए जीएसटी की दर टैक्स 5% ही है। ये दरें इनपुट टैक्स क्रेडिट के बिना है। आईटीसी के साथ यह टैक्स की दरें 8% और 12% ही रखी गई है। हालांकि इसमें चालू हाउसिंग प्रोजेक्ट्स पर डेवलपर को यह छूट की गई है कि वह नई टैक्स व्यवस्था में बने रहना चाहता है या फिर पुरानी। रियल एस्टेट सेक्टर लंबे समय से नकदी की स्थिति को सुधारने के लिए उपाय किए जाने चाहिए। साथ ही उनके पुराने कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग की जाए। कारोबारियों का कहना है कि इन दिनों प्रॉपर्टी की कीमतें स्थिर ही बनी हुई हैं तथा अफोर्डेबल हाऊसिंग पर फोकस किया जा रहा है।