रायपुर। छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के साथ ही अब विधानसभा उपचुनाव की चर्चा तेज हो गई है। चित्रकोट विधायक दीपक बैज अब बस्तर लोकसभा के सांसद चुन लिये गये हैं। ऐसे में उनके सांसद बनने के बाद चित्रकोट सीट पर उपचुनाव होगा। वहीं, दंतेवाड़ा विधायक भीमा मंडावी की नक्सली ब्लास्ट में मौत के बाद वहां उपचुनाव होना है। पिछले विधानसभा चुनाव में बस्तर की 12 सीट में से सिर्फ एक सीट दंतेवाड़ा में भाजपा को जीत मिली थी। अब दोनों सीट पर उपचुनाव होने से नेता नये सिरे से समीकरण साधने में भी जुटेंगे।

छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद ऐसा दूसरी बार हो रहा है, जब कोई विधायक सांसद चुना गया है। इससे पहले अंतागढ़ विधायक रहते हुए विक्रम उसेंडी ने कांकेर लोकसभा का चुनाव जीता था। अंतागढ़ उपचुनाव में ही मंतूराम प्रकरण हुआ था, जिसकी देश-विदेश में जमकर चर्चा हुई। इसी मंतूराम कांड के बाद अजीत जोगी और अमित जोगी कांग्रेस से बाहर होकर नई पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ का गठन किया था।

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने चार विधायकों को मैदान में उतारा था। लेकिन तीन विधायक धनेंद्र साहू, लालजीत सिंह राठिया और खेलसाय सिंह को हार का सामना करना पड़ा। राजनीतिक प्रेक्षकों की मानें तो अगर ये तीन विधायक भी चुनाव जीत जाते तो प्रदेश में पांच सीटों पर उपचुनाव करानी की नौबत आ जाती।

बस्तर में उपचुनाव में नये राजनीतिक समीकरण देखने को मिलेंगे। कांग्रेस और भाजपा ने बस्तर की सियासत से जमे-जमाए नेताओं और उनके परिवार की दखल को कम करते हुए नये चेहरों को मौका दिया है। कांग्रेस कर्मा परिवार और भाजपा कश्यप परिवार के साये से उबरने की कोशिश कर रही है।

भाजपा की राजनीति के जानकारों की मानें तो बस्तर लोकसभा में हार का एक बड़ा कारण कश्यप परिवार के सदस्य को टिकट नहीं देना है। बलीराम कश्यप के बाद दिनेश कश्यप दो बार सांसद रहे, लेकिन अचानक टिकट काटने के कारण कश्यप के करीबी नेताओं की नाराजगी भी सामने आई थी।


उपचुनाव में नए चेहरे पर दांव

कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दल उपचुनाव में नये चेहरे पर दांव लगा सकते हैं। दंतेवाड़ा से जहां भाजपा भीमा मंडावी की पत्नी को उम्मीदवार बना सकती है, वहीं कांग्रेस देवती कर्मा के साथ अन्य विकल्पों पर भी विचार कर सकती है। वहीं चित्रकोट में भी दोनों दल नये उम्मीदवार पर दांव लगा सकते हैं।