रायपुर। भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक ने वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य की वित्तीय स्थिति और आय-व्यय के ब्योरे पर एक रिपोर्ट बुधवार को जारी की। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि उक्त वित्तीय वर्ष के दौरान राज्य सरकार ने कृषक जीवन ज्योती योजना के अंतर्गत राज्य के बीपीएल परिवारों और किसानों को सिंचाई पंप के लिए मुफ्त बिजली देने की योजना के लिए छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के माध्यम से विभिन्न वित्तीय संस्थानों से कर्ज के रूप में 1955 करोड़ रुपए लिए।

इस राशि के मूलधन और ब्याज को चुकता करने का दायित्व सीधा राज्य सरकार पर है, लेकिन सरकार के वार्षिक लेखे में इस देनदारी का कोई उल्लेख नहीं है। विधानसभा के दो दिवसीय विशेष सत्र के दौरान बुधवार को मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने कैग की रिपोर्ट पटल पर पेश की। रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2016-17 में कुल लोक ऋण 26, 050.16 करोड़ से बढ़करक 30,377.45 करोड़ हो गया है।

इसमें करीब 16 फीसदी की वृद्धि हुई है। वहीं प्रदेश ने वर्ष 2016-17 में 37,754.37 करोड़ का राजस्व प्राप्त किया। वर्ष 2016-17 के दौरान ही राज्य का वित्तीय घाटा 4,047.27 करोड़ था।

राज्य सरकार ने वर्ष 2016-17 के दौरान आकस्मिकता निधि कोष को 40 करोड़ से बढ़ाकर 100 करोड़ कर दिया है। वहीं सरकार 31 मार्च 2017 अपने द्वारा प्रदान किए गए ऋणों में 1,373.68 करोड़ रुपए बकाया है।