रायपुर। छत्तीसगढ़ में लोकसभा के तीसरे चरण का प्रचार अभियान खत्म होने के बाद भाजपा ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की नागरिकता पर जवाब मांगा है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेंडी ने राहुल की नागरिकता को लेकर सामने आए दस्तावेजी साक्ष्यों के मद्देनजर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

उसेंडी ने कहा कि राहुल गांधी ने यूके की एक कंपनी के दस्तावेजों में स्वयं को ब्रिटिश नागरिक बताया है। इस संबंध में अब तक उठी आपत्तियों को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी ने अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है। यह चौंकाने वाली बात है कि इस विवाद पर जवाब देने के बजाय गोलमोल बातें की जा रही है।

कांग्रेस और राहुल गांधी को देश को यह जवाब तो देना ही होगा कि क्या वह ब्रिटिश नागरिक बने थे? क्या वे भारत के नागरिक हैं? दोहरी नागरिकता धारण करना एक गंभीर अपराध की श्रेणी में तो आता ही है, नागरिकता समाप्त होने के बाद कोई भी चुनाव नहीं लड़ सकता है।

उसेंडी ने नागरिकता के साथ-साथ राहुल गांधी के शैक्षणिक दस्तावेजों भी गंभीर विसंगतियों व अंतर की भी चर्चा की और कहा कि पहले राहुल गांधी ने कैंब्रिज से 1995 में एमफिल की डिग्री लेने की जानकारी दी। वर्ष 2009 में उन्होंने बताया कि 1994 में फ्लोरिडा से स्नातक किया। 1995 में ट्रिनिटी कॉलेज से एमफिल की, जबकि 2014 में उन्होंने डेवलपमेंट पर एमफिल करने की जानकारी दी।

जवानों का मनोबल क्यों तोड़ रही प्रदेश सरकार?

नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने प्रदेश सरकार द्वारा नक्सल क्षेत्रों के लिए स्वीकृत विशेष भत्ता बंद करने के निर्णय को गलत बताया है। कौशिक ने कहा कि प्रदेश की पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने नक्सल क्षेत्र में काम करने वालों के लिए प्रोत्साहन स्वरूप विशेष भत्ता स्वीकृत किया था।

उन्‍होंने कहा कि बस्तर में तैनात जवान रोजाना अपनी जान जोखिम में डालकर नक्सल क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। नितांत विपरीत परिस्थितियों में काम कर रहे जवानों के लिए घोषित विशेष भत्ता बंद करके प्रदेश सरकार ने न केवल तैनात जवानों का मनोबल कमजोर करने का काम किया है, बल्कि विधानसभा चुनाव जीतने के लिए नक्सलियों से गलबहियां करके क्रांतिकारी बताने के अपने एजेंडे पर काम करने की मंशा भी जाहिर कर दी है। जवानों का मनोबल तोड़ने में प्रदेश सरकार की इतनी रुचि क्यों हैं?