रायपुर। लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में मंगलवार को छत्तीसगढ़ की सात सीटों पर चल रहे मतदान के शुरुआती करीब दो घंटे कई स्थानों से ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायतें मिलती रहीं। इसके चलते विलंब से मतदान शुरू हो पाया। हालांकि शिकायतें आने के साथ ही इसे सुधारने व बदलने का काम भी चलता रहा, लेकिन इसके चलते कई मतदाता बूथों से लौट भी गए।

रायपुर के सुंदर नगर मतदान केंद्र 184 में एक घंटे विलंब से मतदान शुरू हुआ। टिकरापारा स्कूल बूथ क्रमांक 130, टैगोरनगर के बूथ क्रमांक 38, आदर्श मतदान केंद्र कोटा के बूथ 25 व 28, कुशालपुर के बूथ क्रमांक 156, दुर्गा कॉलेज, सेंट पाल स्कूल में 26 नंबर बूथ, विवेकानंद नगर में 38 नंबर बूथ और संत कंवरराम कन्या शाला में 19 बूथ में ईवीएम खराब होने की वजह से मतदान प्रभावित रहा। छत्तीसगढ़ की अन्य लोकसभा सीटों से भी ईवीएम में खराबी की शिकायतें आती रहीं। जिन बूथों में देर से मतदान शुरू हुआ, कहा जा रहा है कि वहां मतदान के लिए अतिरिक्त समय दिया जाएगा।

अम्बिकापुर के मतदान केंद्र क्रमांक 88 बीटीआई मतदान केंद्र में ईवीएम में खराबी के चलते एक घंटे विलंब से मतदान शुरू हुआ। बिलासपुर लोकसभा के मस्तूरी विधानसभा चुनाव क्षेत्र के केंवटाडीह टांगर बूथ के क्रमांक 244 में वीवीपैट मशीन खराब होने से एक घंटे देर से वोटिंग शुरू हुई।

जशपुर के बूथ क्रमांक 259, जांजगीर चाम्पा विधानसभा क्षेत्र के बूथ क्रमांक 216 वरगाव, कोरबा संसदीय क्षेत्र के मरवाही विधानसभा क्षेत्र के दानीकुंडी बूथ क्रमांक 33, जैजैपुर विधानसभा क्षेत्र बिर्रा के बूथ क्रमांक 54, पामगढ़ विधानसभा के कोसला स्थित मतदान केंद्र समेत सात सीटों के कई अन्य बूथों में ईवीएम व वीवीपैट मशीन में खराबी आने के चलते मतदान प्रभावित रहा।


पहचान पत्र को लेकर जागरूकता नहीं, बूथों से लौटना पड़ा

मतदान में पहचान पत्र की अनिवार्यता के चलते बहुत से मतदाताओं को परेशान होना पड़ा। वहीं कई तो मतदान किए बिना ही बूथों से लौट गए। इसे लेकर नाराजगी की खबरें भी हैं। इस बार के चुनाव में निर्वाचन आयोग ने जिस सख्ती से पहचान पत्र की अनिवार्यता को अमल में लाने को कहा है, उसका असर साफ नजर आ रहा है।

हालांकि इसका प्रचार-प्रसार भी हुआ। मीडिया के जरिये भी यह संदेश लगातार दिया जाता रहा कि मतदान के लिए पहचान पत्र जरूरी है। बावजूद इसके कई लोग केवल निर्वाचन आयोग अथवा राजनीतिक दलों द्वारा दी जाने वाली मतदाता पर्ची को लेकर ही मतदान केंद्रों में पहुंचते रहे। ऐसे लोगों को मतदान नहीं करने दिया जा रहा है। इससे सबसे ज्यादा बुजुर्गों को परेशानी हुई।