रायपुर । मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनकी सरकार के नौ मंत्रियों की साख वाली सीटों पर पंजा परास्त हो गया। कांग्रेस सरकार के दो मंत्री कवासी लखमा और जयसिंह अग्रवाल ही अपनी प्रतिष्ठा बचा पाए। वहीं, कांग्रेस के दिग्गज नेता और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत भी पत्नी को जिताकर साख बचाने में सफल रहे। इधर, विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद डॉ. रमन सिंह समेत भाजपा के सभी धुरंधर नेता लोकसभा चुनाव की अग्नि परीक्षा में पास हो गए हैं।


मुख्यमंत्री बघेल पाटन विधानसभा क्षेत्र के विधायक हैं, जो कि दुर्ग संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है। इसी संसदीय क्षेत्र से मंत्री ताम्रध्वज साहू हैं, इसलिए उन्हें वहां का प्रभार दिया गया था। बघेल और साहू मिलकर दुर्ग सीट को नहीं बचा पाए। सीएम पद के दावेदार रहे कांग्रेस सरकार के कद्दावर मंत्री टीएस सिंहदेव को सरगुजा लोकसभा सीट का प्रभार मिला हुआ था। यह सीट भी कांग्रेस के हाथ नहीं लगी।


विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा वोट से जीतने वाले मंत्री मोहम्मद अकबर अपने प्रभार वाली राजनांदगांव लोकसभा सीट को कांग्रेस की झोली में नहीं ला पाए। कांग्रेस सरकार के युवा मंत्री और युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष उमेश पटेल को रायगढ़ लोकसभा सीट का प्रभार मिला था, वहां से भाजपा जीत गई। रायपुर में महापौर प्रमोद दुबे और पूर्व महापौर सुनील सोनी का मुकाबला था।


महापौर दुबे को जिताने के लिए मंत्री डॉ. शिव डहरिया को प्रभारी बनाया गया था, वे विफल रहे। बसपा के प्रभाव वाली जांजगीर-चांपा लोकसभा सीट की जिम्मेदारी मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह को मिली थी, जिस पर भाजपा का कब्जा हो गया। साजा विधानसभा क्षेत्र के विधायक और मंत्री रविंद्र चौबे बिलासपुर संसदीय क्षेत्र के प्रभारी थे, जहां कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है।


मंत्री रूद्रकुमार महासमुंद लोकसभा के प्रभारी थे, जहां शुरुआत में कांग्रेस को बढ़त मिली, लेकिन दोपहर बाद भाजपा प्रत्याशी ने एक बार रफ्तार पकड़ी, तो सीट पर कब्जा करके माने। महिला मंत्री अनिला भेंड़िया के प्रभार वाले कांकेर लोकसभा क्षेत्र में भी कांटे के मुकाबले के बाद कांग्रेस को सीट गंवानी पड़ी।


कोरबा लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस के दो दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर थी। प्रभारी होने के नाते मंत्री जयसिंह अग्रवाल और पत्नी के चुनाव लड़ने के कारण विधानसभा अध्यक्ष डॉ. महंत की साख दांव पर थी। दोनों ने साख बचा ली। बस्तर सीट को जिताकर मंत्री कवासी लखमा भी प्रतिष्ठा बचाने में सफल हुए हैं।


भाजपा ने हिसाब चुकता किया

विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार का हिसाब भाजपा ने लोकसभा चुनाव में चुकता किया। भाजपा ने नौ सीटों पर कब्जा किया, इसमें से तीन सीट पर दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी। राजनांदगांव सीट में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, कांकेर सीट में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेंडी और रायपुर सीट में पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने पूरी ताकत लगा दी थी, तीनों नेता सफल रहे।