रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने पिछले वित्तीय वर्ष (2018-19) में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के माध्यम से 12 हजार 900 करोड़ स्र्पये का कर्ज लिया है। इसके बावजूद राज्य का कुल ऋण दायित्व अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है।

आरबीआई की ताजा रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ का ऋण दायित्व डीजीपी का 17.4 फीसद है, जबकि अन्य राज्यों का औसत 24.3 फीसद है। वहीं, दूसरे राज्य अपनी कुल आमदनी का 11.6 फीसद राशि ऋण का ब्याज चुकाने में खर्च करते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ का केवल 4.6 फीसद राशि ही ब्याज में जाता है। यही वजह है कि सरकार का दावा है कि कर्ज माफी, धान का बढ़ा हुआ समर्थन मूल्य और बिजली बिल हाफ करने के बावजूद विकास कार्यों पर बड़ी राशि खर्च की जा रही है।


तीन महीने में 700 निर्माण कार्य शुरू करने का दावा

सरकार ने दावा किया है कि बीते तीन महीने में 700 निर्माण कार्य शुरू करने की अनुमति दी गई है। इसमें सड़क और सिंचाई सुविधा से संबंधित कार्य शामिल हैं। आचार संहिता खत्म होने के बाद बाकी निर्माण कार्यों की स्वीकृति दी जाएगी।


जारी रहेगी भर्ती की प्रक्रिया

लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले सरकार ने 15 हजार शिक्षकों, 800 नर्स, 15 सौ सहायक प्राध्यापका आदि की भर्ती की घोषणा की थी। इसकी प्रक्रिया चल रही है। अफसरों ने बताया कि पूर्व के वर्षों में दी गई भर्तियों की अनुमतियों को रोकने के निर्देश नहीं है।


भर्ती पर रोक सामान्य प्रक्रिया

सीधी भर्ती के पदों पर वित्त विभाग की अनुमति संबंधित आदेश को लेकर अफसरों का कहना है कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है। वित्तीय और प्रशासनिक अनुशासन के लिए ऐसा किया जाता है, ताकि अनावश्यक और अनियमित भर्ती की रोकथाम की जा सके। साथ ही आवश्यक पदों पर भर्ती में कोई व्यवधान न हो। उल्लेखनीय है कि विगत वर्षों में आउट- सोर्सिंग के माध्यम से की जाने वाली भर्तियों के विरूद्ध बड़े पैमाने पर जनाक्रोश नजर आया था।


इस वर्ष लगभग 11 हजार करोड़ का कर्ज ले सकती है सरकार

वित्त विभाग के अफसरों ने बताया कि राज्यों को विकास कार्यों के लिए ऋण लेने की वार्षिक सीमा केंद्र सरकार हर साल जारी करती है। राज्य की साख ऐसी है कि चालू वित्तीय वर्ष में छत्तीसगढ़ सरकार 10,926 करोड़ का कर्ज ले सकती है। 2018-19 में यह सीमा 12,979 करोड़ थी। इसके विस्र्द्ध सरकार ने 12,900 करोड़ का कर्ज लिया है।