रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साहू पॉलिटिक्स करके चुनाव को अब पिछड़े वर्ग पर फोकस कर दिया है। प्रधानमंत्री ने साहू समाज को साधने के लिए दांव खेला, लेकिन कांग्रेस मोदी को बहुरुप‍िया बताकर ओबीसी वोट पर निशाना लगा रही है। वहीं, साहू समाज के भीतर की राजनीति भी गरमा गई है।

कुछ लोग मोदी के बयान को सही मान रहे हैं, तो कुछ मोदी के बयान से खफा है। साहू समाज के बड़े वर्ग ने पत्र जारी करके इस बात पर नाराजगी जताई है कि मोदी ने साहू समाज को चोर से जोड़ दिया है। साहू समाज के नेताओं का कहना है कि एक व्यक्ति की गलती पूरे समाज की गलती नहीं हो सकती।

विधानसभा चुनाव हो या लोकसभा चुनाव, कांग्रेस अपने हर चुनावी मंच से मोदी पर राफेल घोटाला, नोटबंदी, जीएसटी, छद्म राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों पर हमला कर रही थी। अब मोदी ने कांग्रेस को नया मुद्दा दे दिया है। कांग्रेस के स्टार प्रचारक, स्थानीय नेता अब अपने बयान और सभाओं में मोदी को बहुस्र्पिया बोल रहे हैं। कांग्रेसियों का कहना है कि मोदी कभी चायवाला बन जाते हैं, तो कभी प्रधान सेवक। चौकीदार भी बन चुके हैं।

अब ओबीसी वोट की राजनीति कर रहे हैं। दरअसल, प्रदेश में ओबीसी वर्ग की आबादी एक करोड़ 20 लाख है। यह प्रदेश की कुल आबादी का 45 फीसद है। कुल मतदाताओं में 30 फीसद से अधिक ओबीसी वोटर हैं। इस कारण ओबीसी वोट की खींचतान मची हुई है। कांग्रेस और भाजपा ने अपने-अपने ओंबीसी नेताओं को पिछड़े वर्ग के विभिन्न् समाज प्रमुखों को साधने में लगा दिया है।

भाजपा के लोग राहुल के बयान को मुद्दा बनाकर ओबीसी वोट को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहे हैं, तो कांग्रेसी मोदी के बयान को ओबीसी वर्ग के लोगों को अपमान बता रहे हैं। अब 23 मई को नतीजा आने के बाद ही अंदाजा लगाया जा सकेगा कि साहू या ओबीसी पॉलिटिक्स किसके लिए फायदे वाली रही और किसे नुकसान पहुंचाया? अभी तो तीसरे चरण की सातों लोकसभा सीटों में यह मुद्दा गरमाया हुआ है।

छत्तीसगढ़ से दी ओबीसी पॉलिटिक्स को हवा

16 अप्रैल को पीएम मोदी की कोरबा और भाटापारा में चुनावी सभा हुई थी। उन्होंने अपनी सभा में यह कहा था कि राहुल गांधी ने सभी मोदी को चोर कहा है। गुजरात में मोदी, साहू होते हैं, इसलिए राहुल ने पूरे साहू समाज को चोर कहा है। इसके बाद मोदी ने महाराष्ट्र में मोदी उपनाम को न केवल साहू, बल्कि पूरे पिछड़े वर्ग से जोड़ दिया।