रायपुर। छत्तीसगढ़ की महत्वाकांक्षी रेल परियोजनाओं में शामिल डोंगरगढ़-कटघोरा रेल लाइन के निर्माण में महाराष्ट्र सरकार भी निवेश करेगी। महाराष्ट्र की फडणनवीस कैबिनेट ने महाराष्ट्र बिजली उत्पादन कंपनी को इस परियोजना में साझीदार बनाने की मंजूरी के साथ ही 250 करोड़ रुपए निवेश की अनुमति दे दी है।

परियोजना में कंपनी की 26 फीसदी हिस्सेदारी रहेगी। दक्षिण पूर्वी कोल फील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) पहले ही इस परियोजना में निवेश की सहमति दे चुकी है। छत्तीसगढ़ रेल कार्पोरेशन के अफसरों को उम्मीद है कि एक-दो महीने के अंदर ही रेल लाइन का काम शुरू हो जाएगा।

महाराष्ट्र बिजली उत्पादन कंपनी इसलिए करेगी निवेश केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र बिजली उत्पादन कंपनी को छत्तीासगढ़ स्थित गारे पालमा सेक्टर-2 कोल ब्लॉक आवंटित किया है। इस खदान से प्रति वर्ष 24 मिलियन मीट्रिक टन कोयला उत्पादन की संभावना है।

कंपनी को कोल ब्लॉक 30 वर्ष के लिए दिया गया है। मौजूदा स्थिति में कोयला परिवहन के लिए कंपनी को मुम्बई-हावड़ा रेल लाइन का इस्तेमाल करना पड़ेगा। इस लाइन पर ट्रैफिक लोड अध्ािक है। ऐसे में परिवहन न केवल महंगा पड़ेगा, बल्कि दिक्कत भी होगी।

इसी वजह से कंपनी ने इस लाइन के समानांतर बन रही इस नई रेल लाइन में निवेश का फैसला किया है। दो हिस्सों में बनेगी रेल लाइन रेल मंत्रालय ने 277 किमी की इस पूरी रेल लाइन को दो हिस्सों में मंजूरी दी है। पहला हिस्सा कटघोरा से करताला तक 22 किमी का है। दूसरा 255 किमी का होगा जो करताला से शुरू हो कर मुंगेली, कवर्धा और खैरागढ़ होते हुए डोंगरगढ़ तक जाएगी।

48 सौ करोड़ की परियोजना

करीब 277 किलो मीटर लंबी प्रस्तावित डोंगरगढ़-कटघोरा रेल लाइन पर 4821 करोड़ स्र्पये की लागत का अनुमान है। परियोजना लागत पर होने वाले इस व्यय का 80 फीसदी हिस्सा ऋण के जरिए जुटाने की योजना है। बाकी खर्च तीनों कंपनियां यानि छत्तीसगढ़ रेल कार्पोरेशन, एसईसीएल और महाराष्ट्र बिजली उत्पादन कंपनी वहन करेंगे।