रायपुर। छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव के लिए 11 में से पांच सीटें ऐसी हैं, जिसमें कांग्रेस के मंत्री, विधायक पत्नी, बेटा या बेटी के लिए टिकट की लॉबिंग कर रहे हैं। इधर, हाईकमान ने विधायकों, सांसदों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के परिवार वालों को टिकट नहीं देने का फैसला लिया है। हाईकमान के इस फैसले से पत्नी, बेटा, बेटी के लिए टिकट की लॉबिंग करने वाले नेताओं की चिंता बढ़ गई है।

परिवार के सदस्य के लिए टिकट की लॉबिंग करने वाले वरिष्ठ नेताओं में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास मंहत, मंत्री कवासी लखमा, मंत्री ताम्रध्वज साहू, विधायक अमितेष शुक्ल, विधायक रामपुकार सिंह शामिल हैं। डॉ. महंत कोरबा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ते हैं। राज्य बनने के बाद पहली बार अभी विधानसभा चुनाव लड़े और सक्ति से विधायक चुने गए। डॉ. महंत न केवल विधायक, बल्कि विधानसभा अध्यक्ष भी बना दिए गए हैं।

इस कारण पार्टी में इस बात की चर्चा है कि कोरबा सीट से महंत पत्नी ज्योत्सना महंत के लिए टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। बस्तर संभाग के एकमात्र मंत्री कवासी लखमा बेटे हरिश कर्मा को बस्तर से लोकसभा चुनाव लड़ाना चाह रहे हैं। मंत्री ताम्रध्वज साहू दुर्ग ग्रामीण से विधायक हैं, इससे पहले वे दुर्ग के सांसद थे।

मंत्री बनने के बाद उन्होंने सांसद पद से इस्तीफा दे दिया है। इस कारण दुर्ग लोकसभा सीट से वे बेटे जितेंद्र साहू को चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने दिल्ली में भी आला-नेताओं से इस संबंध में चर्चा की थी। राजिम के विधायक अमितेष शुक्ल महासमुंद लोकसभा सीट से बेटे भवानीशंकर शुक्ल के टिकट के लिए लगे हुए हैं।

इसके लिए शुक्ल कई बार दिल्ली का चक्कर भी लगा चुके हैं। पत्थलगांव के विधायक रामपुकार सिंह रायगढ़ लोकसभा सीट से बेटी आरती सिंह के टिकट के लिए जोर लगा रहे हैं। आरती को पार्टी ने पिछले लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाया था।

अभी आरती ने फिर से प्रदेश प्रभारी सचिव डॉ. चंदन यादव को आवेदन देकर अपनी दावेदारी ठोंक दी है। अब हाईकमान के फैसले के बाद उन दावेदारों में उम्मीदें बढ़ गई हैं, जो बिना किसी जुगाड़ के दावेदारी कर रहे हैं।

बस्तर के लिए कर्मा, लखमा में खींचतान

बस्तर लोकसभा सीट के लिए मंत्री व कोंटा के विधायक कवासी लखमा और दंतेवाड़ा की पूर्व विधायक देवती कर्मा के बीच खींचतान है। लखमा अपने बेटे हरिश कर्मा के लिए टिकट की लॉबिंग कर रहे हैं, जबकि देवती कर्मा अपने पुत्र दीपक कर्मा के लिए टिकट मांग रही हैं।

दीपक ने विधानसभा चुनाव में दंतेवाड़ा से निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए नामांकन भरा था, लेकिन राहुल गांधी से चर्चा के बाद उन्होंने मां के समर्थन में अपना नाम वापस ले लिया था।