रायपुर (अनुज सक्सेना)। केंद्र में चार साल और छत्तीसगढ़ में 15 साल से सत्ता से दूर कांग्रेस पार्टी की आर्थिक स्थिति बुरी तरह से चरमरा गई है। माना जा रहा है कि पार्टी इस बार चुनाव में प्रत्याशियों की उतनी मदद नहीं कर पाएगी, जितना पहले करती रही है। प्रत्याशियों को चुनाव में अपनी थैली खोलनी पड़ेगी।

अभी स्थिति यह है कि छत्तीसगढ़ में पार्टी के खाते में इतना पैसा भी नहीं है कि कोई कार्यक्रम कराया जा सके। आलम यह है कि संकल्प शिविर के लिए दावेदारों से 50-50 हजार रुपये की मदद ली जा रही है। सहयोग राशि देने वाले दावेदारों को ही बड़े नेताओं, जोन, बूथ और पारा-टोला प्रभारियों के सामने मंच पर खड़ा होने का मौका मिल रहा। दावेदारों को सामने लाया तो जा रहा है, लेकिन उन्हें यह संकल्प भी दिलाया जा रहा है कि उनमें से प्रत्याशी कोई भी बने, बाकी दावेदारों को चुनाव जिताने के लिए ईमानदारी व पूरी मेहनत के साथ काम करना होगा।

रायपुर उत्तर विधानसभा का संकल्प शिविर मंगलवार को हुआ। इसमें आठ दावेदार मंच पर बुलाए गए। सभी से संकल्प शिविर के लिए भवन का किराया, टेंट, साउंड सिस्टम, चाय, नाश्ता और भोजन के लिए 50-50 हजार रुपये लिए गए थे। बुधवार को रायपुर दक्षिण विधानसभा का संकल्प शिविर गांधी मैदान स्थित रंगमंदिर में हुआ। इसके लिए भी सात दावेदारों से 50-50 हजार रुपये लिए गए। पार्टी के नेताओं का कहना है कि यह व्यवस्था इसलिए लागू करनी पड़ी है, क्योंकि पार्टी फंड में ऐसे किसी भी कार्यक्रम के लिए पैसे नहीं हैं।

इनका कहना है

हम अपने कार्यकर्ताओं से सहयोग लेकर कार्यक्रम कर रहे हैं। किसी के पेट में दर्द क्यों हो रहा? हमारे कार्यकर्ता ही तो दावेदार रहेंगे। अगर, वो सहयोग कर रहे हैं तो मंच पर बुलाकर उनका सम्मान किया जा रहा है। इसमें क्या गलत है? कांग्रेस पैसे से नहीं, अपने कार्यकर्ताओं के दम पर चुनाव लड़ेगी - भूपेश बघेल, पीसीसी अध्यक्ष, छत्तीसगढ़