अनुज सक्सेना, रायपुर । छत्तीसगढ़ में चुनावी घोषणापत्र तैयार करने के लिए कांग्रेस मैदान से लेकर पहाड़ तक चढ़ी और अब पाताल में भी उतर गई है। घोषणापत्र तैयार करने की जिम्मेदारी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव की है। कोयला मजदूरों की समस्या जानने के लिए वे गमबूट और हेलमेट पहनकर कोयले की खतरनाक भूमिगत खदानों में उतर गए। कांग्रेस उन सभी जगहों पर पहुंच रही है जहां जनता की समस्याओं को समझने की गुंजाइश है। इसी आधार पर इस बार जमीनी घोषणापत्र बनाने की कवायद की जा रही है।

छत्तीसगढ़ में सरकार बनाने के लिए कांग्रेस बहुत कुछ पहली बार कर रही है। चाहे वह संगठन का बूथ स्तर तक विस्तार हो या प्रत्याशी चयन का फॉर्मूला या फिर चुनावी घोषणापत्र तैयार करने की मशक्कत।

इस बार घोषणापत्र के मुद्दे जुटाने के लिए कांग्रेस ने मैदानी इलाकों में बिलासपुर, जांजगीर-चांपा का दौरा किया, वहीं पहाड़ी इलाकों में सरगुजा और बस्तर के गांवों की यात्रा की। कोरिया जिला पहुंचे तो सिंहदेव चिरमिरी के भूमिगत कोयला खदान में उतर गए। सुरक्षा के लिए गमबूट और हेलमेट भी पहना। पार्टी की कोशिश है कि ऐसा कोई भी वर्ग न बचे, जिससे घोषणापत्र के लिए उसका सुझाव न लिया गया हो।

कांग्रेस हाईकमान से घोषणापत्र बनाने की जिम्मेदारी मिलने के बाद टीएस सिंहदेव ने पहले तो एक कार्यालय खुलवाया, जहां जनता से सुझाव मंगाए। बात कुछ जमी नहीं तो खुद ही एक-एक जिलों के दौरे पर निकल पड़े। 27 में से 16 जिलों का दौरा वे कर चुके हैं।

हर जिले के प्रबुद्ध वर्ग डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, बड़े व्यापारियों, शिक्षक, रिटायर्ड अधिकारियों से सुझाव लिया जा रहा है, तो फुटपाथ पर मनियारी का सामान या सब्जी बेचने वाले छोटे व्यापारी, मजदूर, किसान से लेकर रिक्शा व ठेले चलाने वालों तक से उनकी जरुरत पूछी जा रही है।

कमजोर वर्ग के लोग चर्चा में संकोच न करें, इसके लिए किसी के साथ खेत में रोपा लगाया तो कहीं साथ बैठकर में पत्तल में खाना खाया। पार्टी के लोगों का कहना है कि इस माह के अंत तक सभी जिलों का दौरा पूरा हो जाएगा। उसके बाद जनता की जरुरतों और सुझावों को सूचीबद्ध किया जाएगा। सामान्य लगने वाले मुद्दे अलग किए जाएंगे, जो कि पहली प्राथमिकता के साथ घोषणापत्र में शामिल होंगे।

गोपनीय होगा घोषणापत्र

घोषणापत्र समिति के अध्यक्ष सिंहदेव का कहना है कि पिछली बार कांग्रेस ने घोषणापत्र पहले जारी कर दिया था, जिसके सबसे बड़े एजेंडे को प्रतिद्वंद्वी दल ने चुरा लिया था। कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में किसानों को धान पर 2000 रुपये समर्थन मूल्य और 250 रुपये बोनस देने की बात शामिल की थी।

क्योंकि, प्रतिद्वंद्वी दल ने बाद में घोषणापत्र जारी किया था तो उसने समर्थन मूल्य को बढ़ाकर 21 सौ रुपये और बोनस को बढ़ाकर 270 रुपये करने की घोषणा कर दी थी। पहले प्रतिद्वंद्वी दल ने अपने घोषणापत्र में समर्थन मूल्य व बोनस को शामिल नहीं किया था, इस बात की पूरी जानकारी है। इसी कारण कांग्रेस इस बार घोषणापत्र तैयार करने में पूरी गोपनीयता बरतेगी।

भाजपा के बाद जारी करने का विचार

प्रदेश कांग्रेस कमेटी इस बार यह कोशिश करेगी कि भाजपा के बाद अपना घोषणापत्र जारी करे। चर्चा यह है कि प्रत्याशियों के नामांकन भरने की अंतिम तिथि एक-दो दिन पहले ही कांग्रेस का घोषणापत्र सार्वजनिक किया जाएगा।

इन जिलों का हो चुका दौरा

बिलासपुर, राजनांदगांव, बेमेतरा, जगदलपुर, रायगढ़, अंबिकापुर, सरगुजा, जांजगीर-चांपा, बलरामपुर, कोरिया, गरियाबंद, महासमुंद, बलौदाबाजार-भाटापारा, मुंगेली, कांकेर, धमतरी।

11 जिलों की जनता तक जाएंगे

रायपुर, दुर्ग, कोरबा, जशपुर, कवर्धा, कोंडागांव, बालोद, सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा जिले की जनता तक पहुंचेंगे। उनकी जरुरत समझेंगे और सुझाव भी लेंगे।