रायपुर (राज्य ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित नागरिक आपूर्ति निगम (नान) घोटाले की सुनवाई रोकने की ईओडब्ल्यू की अपील को कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

कांग्रेस की सरकार बनने के बाद भाजपा शासन में हुए करोड़ों के नान घोटाले की एसआइटी जांच शुरू हुई है। इसको लेकर ईओडब्ल्यू ने विशेष कोर्ट में सुनवाई रोकने की अपील की थी। जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है। एसआइटी 11 बिंदुओं पर जांच करने जा रही है।

ईओडब्ल्यू की अपील परजेल में बंद नान घोटाला के आरोपित तत्कालीन प्रबंधक शिवशंकर भट्ट के अधिवक्ता ने आपत्ति दर्ज कराई। कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, इस मामले में एक साल में सुनवाई पूरी करनी है। अगर मामले की सुनवाई स्थगित की जाती है, तो शिवशंकर भट्ट को मानसिक नुकसान होगा। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो(ईओडब्ल्यू) ने नान मामले में 16 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया था। बाद में दो आइएएस अधिकारियों के खिलाफ पूरक चालान पेश किया गया। प्रकरण में 70 गवाहों का बयान भी दर्ज किया जा चुका है।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि ईओडब्ल्यू ने जांच के लिए जो आधार पेश किया है, उस पर जांच के लिए स्वतंत्र है। इस आधार पर कोर्ट की कार्यवाही स्थगित नहीं की जा सकती। ऐसे में ईओडब्ल्यू के आवेदन को निरस्त किया जाता है। ईओडब्ल्यू जांच के अलावा एसआइटी जांच में अगर कोई नया तथ्य सामने आता है, तो उसे पूरक चालान के रूप में पेश किया जा सकता है। चालान पेश होने के बाद भी जांच एजेंसी को जांच करने पर कोई रोक नहीं है लेकिन इसके लिए न्यायालय से अनुमति नहीं दी जा सकती है।


तीन साल से जेल में हैं भट्ट

नान घोटाले में शिवशंकर भट्ट पिछले तीन साल से जेल में बंद हैं। आइएएस अनिल टुटेजा ने 19 दिसंबर को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को आवेदन देकर निष्पक्ष जांच की मांग की थी। 22 दिसंबर को टुटेजा का आवेदन ईओडब्ल्यू और एंटी करप्शन ब्यूरो के महानिदेशक को भेजा गया है और उनसे बिंदुवार तथ्यात्मक प्रतिवेदन मांगा गया है।