रायपुर। छत्तीसगढ़ में आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के शिक्षकों को पदोन्‍नति का मामला कोर्ट-कचहरी के फेर में ऐसे उलझा कि जब तक उन्हें पदोन्नति मिली कुछ की मृत्यु हो चुकी थी और कई रिटायर हो चुके थे। सुप्रीम कोर्ट से निर्णय होने के बाद भी कई महीने तक मामला लालफीताशाही का शिकार बना रहा।

जब चुनावी आचार संहिता लगने का वक्त आ गया तो अफसरों की तंद्रा टूटी। डर था कि अगर अभी प्रमोशन सूची न जारी की गई तो कोर्ट के आदेश का उल्लंघन होगा। नई सरकार के गठन का इंतजार नहीं किया जा सकता था। लिहाजा जिस दिन आचार संहिता लगी उसी तारीख पर प्रमोशन सूची जारी कर दी गई। मंत्रालय से जारी आदेश की तारीख 6 अक्टूबर है, इसी दिन आचार संहिता भी लगी थी। हालांकि आरोप लगाए जा रहे हैं कि आदेश आचार संहिता लगने के दो दिन बाद बैकडेट से जारी किया गया है।

राज्य सरकार ने आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विभाग के व्याख्याता और प्रधानपाठक को प्राचार्य और उप प्राचार्य के पद पर पदोन्न्त करने के लिए 8 अप्रैल 2013 को डीपीसी की थी। 5 जून 2013 को प्राचार्य और उप प्राचार्य की पदोन्न्ति सूची जारी की गई तो विवाद हो गया।

पदोन्नति से वंचित रह गए शिक्षकों ने वरिष्ठता सूची में त्रुटि का आरोप लगाया और मामले को हाई कोर्ट ले गए। 2014 में हाई कोर्ट ने शिक्षकों के हक में फैसला दिया लेकिन राज्य सरकार ने पदोन्नति नहीं दी। सरकार ने 2016 में हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इस साल सुप्रीम कोर्ट से निर्णय आया इसके बाद 27 जून को रिव्यू डीपीसी आयोजित की गई।

आनन फानन में किया चुनावी प्रमोशन

पदोन्नति आदेश निकलता इससे पहले ही चुनावी आचार संहिता का वक्त आ गया। चुनावी साल में सरकार पहले से ही सरकारी कर्मचारियों की नाराजगी झेल रही है। ऐसे में 349 शिक्षकों की पदोन्नति रोकने के नए विवाद में नहीं पड़ना चाहती थी। इसीलिए आचार संहिता लगने के दिन प्रमोशन का आदेश जारी किया गया।

तीन शिक्षकों को मरणोपरांत पदोन्नति

सूची में तीन शिक्षक ऐसे हैं जिन्हें मरणोपरांत पदोन्नति दी गई है। इसकें गरियाबंद के प्रभारी सहायक संचाल स्वर्गीय भनुप्रताप सिंह साहू, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय उदयपुर जिला अंबिकापुर के स्वर्गीय कमल सिंह तथा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पटेला जिला अंबिकापुर के स्वर्गीय ननकू राम का नाम शामिल है। इन्हें मरणोपरांत काल्पनिक रूप से पदोन्नत किया गया है। सूची में कई नाम ऐसे भी हैं जो पदोन्नति के पहले रिटायर हो चुके हैं।

मामला कोर्ट में था इसलिए पदोन्न्ति अटकी थी। जिनका नाम डीपीसी में था उन्हें पदोन्न्ति दी गई है।

- गौरव द्विवेदी, सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग