बिलासपुर। बिलासपुर जिले का ग्राम अकलतरी प्रदेश का पहला गांव बनने जा रहा है जहां भूजल को संग्रहित करने और जल स्तर को बनाए रखने के लिए जल्द ही योजना धरातल पर नजर आएगी। राज्य शासन ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत इस योजना को अमलीजामा पहनाने की तैयारी भी शुरू कर दी है।

सेटेलाइट के जरिए प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर अकलतरी में भूजल स्तर की बहुलता है। जिस जगह पर इसकी प्रचुर मात्रा है उसे चिन्हांकित कर लिया गया है। पानी की प्रचुरता वाली जगह पर जलाशय बनाने का कार्य किया जाएगा। इसके साथ ही बोरवेल के जरिए बड़े-बड़े होल किए जाएंगे। बारिश के दिनों में गांव के अलावा आसपास के क्षेत्रों से पानी को संग्रहित कर जलाशय में छोड़ा जाएगा। कोशिश रहेगी कि बारिश के दिनों में बूंद भर पानी जाया न हो।

एक-एक बूंद पानी को इकठ्ठा करने के लिए कार्ययोजना भी बनाई जा रही है। गांव में ऐसी जगह जहां बारिश के दिनों में पानी बड़ी मात्रा में इकठ्ठा होता है और बिना उपयोग खत्म भी हो जाता है ऐसी जगहों से नाली का निर्माण किया जाएगा। नाली का संपर्क सीधे जलाशय से रहेगा। गांव की गलियों से जो पानी नदियों या खुले मैदान में बह जाता है उसे भी स्टोर करने किया जाएगा।

पीएचई और कृषि विभाग की रिपोर्ट पर नजर डालें तो अकलतरी,लखराम और देवरी सहित आसपास के गांव में बीते चार वर्षों के दौरान खेती का रकबा काफी बढ़ा है। इसके अलावा बोरवेल कराने वाले किसानों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। बोरवेल कराने वाले किसानों और खेती का रकबा बढ़ने से पीएचई और कृषि विभाग के अफसर उत्साहित भी नजर आ रहे हैं। अफसरों का मानना है कि खेती का रकबा बढ़ने का मतलब साफ है कि भेजल स्तर में या तो बढ़ोतरी हो रही है या फिर भूमिगत जल का स्तर यथावत बना हुआ है। सेटेलाइट रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि भी हो चूकी है।

ये होगा फायदा

अकलतरी से लगे आसपास के गांव जहां भूजल स्तर जीरो है उसे भी रिचार्ज करने में मदद मिलेगी। तकरीबन 20 किलोमीटर के क्षेत्रफल में आने वाले गांवों में पानी की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी। जाहिर है आने वाले दिनों में खेती का रकबा भी बढ़ेगा ।

योजना में यह भी शामिल

अकलतरी,लखराम,देवरी सहित आसपास के गांव से खारंग नदी बहती है। बारिश के दिनों में जब नदी में पानी बहता है तो वाटर लेबल अच्छा बना रहता है। जैसे ही नदी का पानी सूखता है भूमिगत जल का स्तर भी घटने लगता है। इसे देखते हुए लखराम के बने चेकडेम में गर्मी के दिनों में भी पानी भरा जाएगा।

चेकडेम में पानी भरा रहने से भी भूमिगत जल का स्तर यथावत बना रहेगा । गांव के आसपास ही अवैध रेत की खोदाई भी हो रही है। इसके अलावा रेत घाट भी बना दिया गया है। योजना के शुरू होते ही रेत की अवैध खोदाई पर रोक लगाने के साथ ही घाट को भी स्थाईतौर पर बंद किया जाएगा ।

इन गांवों का भी होगा कायाकल्प

पायलट प्रोजेक्ट के धरातल पर आते ही जिले के मुड़ीपार, घुरू, बेलमुंडी, चिचिरदा, सैदा, किरारी, गोड़ी, संबलपुरी, पेंडरवा, कड़ार व सेवार में भी सरफेस वाटर लेबल को रिचार्ज करने पर काम शुरू होगा। इन गांवों को प्राथमिकता में रखा गया है।

150 फीट नीचे चला गया है वाटर लेबल

पीएचई की रिपोर्ट के मुताबिक जिले के 170 गांव ऐसे हैं जहां भूजल स्तर में 145-150 फीट की गिरावट दर्ज की गई है। जल संकट वाले गांवों में बिल्हा व तखतपुर ब्लॉक की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। भूजल विद विभाग की रिपोर्ट पर गौर करें तो तखतपुर की धरातली मिट्टी ऐसी है जहां पानी का स्रोत तो है पर ज्यादा दिनों तक टिकने वाला नहीं है। मसलन सूखे की स्थिति बनी रहेगी ।

जल संकट से निपटने के लिए और भूजल स्तर को मेंटेन करने के लिए अकलतरी में वाटर रिचार्ज सिस्टम बनाया जाएगा। राज्य शासन ने इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शामिल किया है। आचार संहिता समाप्त होते ही योजना पर कार्य शुरू होगा। - डॉ.एसके अलंग-कलेक्टर