रायपुर। आर्सेनिक और फ्लोराइड की अधिकता वाला पानी पीने से प्रदेश में फ्लोरोसिस और किडनी के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। चिंता का विषय यह है कि केंद्र और राज्य सरकार के साझा प्रयास के बावजूद प्रभावित कस्बों की संख्या बढ़ी है।

अगस्त 2016 तक प्रदेश के 1148 कस्बों का पानी आर्सेनिक व फ्लोराइड से प्रभावित था, आज प्रभावित कस्बों की संख्या 1170 पहुंच गई है। इसका मतलब डेढ़ साल में 22 और कस्बों के पानी में फ्लोराइड और आर्सेनिक की मात्रा बढ़ी है।

पानी के नमूनों की जांच से पता चला है कि आर्सेनिक और फ्लोराइड की अधिकता वाला पानी औद्योगिक क्षेत्रों से लगे इलाकों में ज्यादा है। गरियाबंद में 2007 से लोग किडनी की बीमारी के शिकार हो रहे हैं। कोरबा जिले के तीन विकासखंडों में भी आठ-दस साल से ग्रामीण फ्लोरोसिस के कारण विकलांगता के शिकार हो रहे हैं।

इसी तरह बस्तर, रायगढ़, बेमेतरा समेत कुछ और जिलों में भी औद्योगिक क्षेत्र से लगे कस्बों और गांवों में फ्लोराइड और आर्सेनिक की अधिकता वाला पानी ग्रामीणों को पानी पड़ रहा है। हालांकि, राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2018- 19 के बजट में राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के लिए 184 करोड़ का प्रावधान किया है, जिसमें फ्लोराइड व आर्सेनिक प्रभावित 1170 कस्बों और गांवों की समस्या का निराकरण भी शामिल है।

सबसे ज्यादा प्रभावित कस्बे राजस्थान में

डेढ़ साल पहले केंद्र सरकार ने आर्सेनिक और फ्लोराइड की अधिकता वाले कस्बों का राज्यवार आंकड़ा जारी किया था। तब सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके राजस्थान में पाए गए थे। छत्तीसगढ़ के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, झारखंड, बिहार, पंजाब, ओडिशा, कर्नाटक, तेलंगाना में भी स्थिति गंभीर मिली थी।

भयावह है स्थिति

- कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा, पाली और कटघोरा विकासखंड के कई गांवों में फ्लोरोसिस की बीमारी के मरीज हैं। दूषित पानी के कारण किसी का पैर टेड़ा हो गया है तो किसी की कमर झुक गई है।

- गरियाबंद जिले के सुपेबेड़ा में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 55 ग्रामीणों की मौत हो चुकी है, जबकि ग्रामीणों का दावा 103 लोगों की मौत का है। सवा दो सौ से लोग किडनी की बीमारी से ग्रसित हैं।

केंद्र और राज्य ने 2020 का रखा लक्ष्य

केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय ने पेयजल में आर्सेनिक, फ्लोराइड की अधिकता वाले कस्बों और गांवों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्ररय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम शुरू किया है। मार्च 2020 तक सभी प्रभावित कस्बों और गांवों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इस कार्यक्रम के तहत केंद्र और राज्य सरकारों को 50-50 फीसदी राशि खर्च करनी है।

- बस्तर क्षेत्र के लिए समूह जलप्रदाय योजना तैयार की गई है। इस योजना के तहत सतही जलस्त्रोत तैयार किए जाएंगे। बेमेतरा जिले के लिए तीन योजनाएं बनी हैं, जिससे 150 से अधिक गांवों को लाभ होगा। बाकी जिलों के प्रभावित बसाहटों में जहां फ्लारोइड की अधिकता है, वहां फ्लोराइड रिमूवल और जहां आयरन या आर्सेनिक की अधिकता है, वहां आयरन रिमूवल प्लांट लगाए जा रहे हैं। जहां प्लांट बंद हो गए हैं, उन्हें चालू करने का काम जारी है। - शहला निगार, सचिव, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग