रायपुर। राजधानी में भूजल का लगतार गिरता स्तर अलार्मिंग स्थिति में पहुंच गया है। इसका अंदाजा ब्राम्हण पारा में कुओं की स्थिति से लगाया जा सकता है। हालत यह है कि कभी लबालब रहने वाले यहां के दर्जनों कुएं भी सूख गए हैं। कुओं की प्यास बुझाने के लिए टैंकर बुलाने की नौबत आ गई है। ब्राम्हण पारा शहर का वह इलाका है,जहां हर चौथे घर में एक कुआं है। यहां के कुएं पिछले चार दशक से इलाके के बांशिदों की प्यास बुझा रहे हैं। ब्राम्हण पारा को कभी पानी के लिए टैंकर और सरकारी नल पर निर्भर नहीं होना पड़ा था, लेकिन 40 सालों में पहली बार ऐसा हो रहा है, जब कुएं को तर करने के लिए टैंकर बुलाने पड़ रहे हैं। नईदुनिया ने मोहल्ले के सूखते कुओं की स्थिति का जायजा लिया तो पता चला कि दर्जनों कुएं ऐसे भी हैं जो सूखने की कगार पर हैं।

स्थिति भी बदहाल

ब्राह्मणपारा से लगे धोबी मोहल्ले में सौ साल पुराना कुआं है। 71 साल के छेदीलाल निर्मलकर बताते हैं कि 40 साल पहले इस कुएं का पानी थोड़ा कम हुआ था। इसके बाद इन दिनों यह स्थिति देखने को मिल रही है। कुएं में पानी न होने के कारण लोग सरकारी नल व टैंकर पर निर्भर हैं। छेदीलाल ने बताया कि कभी इस कुएं से गर्मी के दिनों में सैकड़ों परिवार के लोग प्यास बुझाते थे।

आधे घंटे में सूख रहा कुआं

साईं गली के पीछे रहने वाले प्रवीण दीवान ने बताया कि कुआं 25 साल पुराना है। कुल गहराई 22 फीट है। आम दिनों में 10 फीट तक पानी भरा रहता है। लेकिन इस गर्मी में 4 फीट तक आ गया है। यह भी आधा घंटा पंप चालू करने से खत्म हो जाता है। इसलिए हमारा प्रयास रहता है कि पानी का सदुपयोग करें और बूंद-बूंद बचाएं।

टैंकर से भर रहे कुएं में पानी

सुनने में अजीब लगता है कि किसी कुएं में टैंकर से पानी भरा जा रहा हो। लेकिन ब्राह्मणपारा के धोबी मोहल्ले में राकेश श्रीवास के घर के कुएं में आए दिन टैंकर से पानी भरा जाता है। राकेश ने बताया कि दो दशक पुराने कुएं में यह स्थिति पहली बार देखने को मिली है। 25 फीट के कुएं में तीन बाल्टी पानी निकल जाए तो बहुत बड़ी बात है।

एक मीटर तक गिरा कुएं का पानी

ब्राह्मणपारा के विनय पांडे ने बताया कि उनके कुएं से आज भी पड़ोसी पानी ले जाते हैं। कुएं की खुदाई 30 साल पहले हुई थी। लेकिन आज तक पानी की कमी नहीं थी। लेकिन इस वर्ष कुएं में पानी का स्तर एक मीटर नीचे तक गिर गया है। हालांकि परिवार में सदस्य कम होने से काम चल जाता है लेकिन मेहमान आते हैं तब परेशानी बढ़ जाती है।

कुआं में पानी कम, पाइप लगाना पड़ा

आजाद चौक निवासी राजेन्द्र तिवारी ने बताया कि उनका कुआं 20 साल पुराना है। 25 फीट में केवल 5 फीट में पानी भरा है। जो कभी अचानक कम हो जाता है। इसके कारण अतिरिक्त पाइप लगाया गया है। कई बार पानी के लिए बाहर जाना पड़ता है। इस समस्या से बचने के लिए हमने वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का फैसला किया है।

समस्या से बचने वॉटर हॉवर्ेिस्टंग सिस्टम लगाए : एक्सपर्ट

भूजल विशेषज्ञ विपिन दुबे बताते हैं कि इस क्षेत्र में पानी का स्रोत कंकाली तालाब से जुड़ा है। इसकी नियमित सफाई नहीं होने के कारण नीचे फीलिटेशन के कारण पानी जमीन के अंदर तक नहीं पहुंच रहा है। इसके अलावा यहां सैकड़ों बोर हैं। वहीं अधिकांश जगह कांक्रीटीकरण हो गया है। इसके कारण यहां वर्षा का पानी नाली के माध्यम से बह जाता है। इसलिए इन समस्याओं से बचने के लिए वॉटर हार्वेंस्टिंग सिस्टम लगाकर आसपास के भूजल स्तर को बढ़ाया जा सकता है।