सब हेडिंग- राजधानी के ही स्कूलों में नहीं है सुरक्षा के इंतजाम, बदतर हालत

-नईदुनिया ने की पड़ताल, सिर्फ दस फीसदी स्कूलों में ही सुरक्षा के लिए गार्ड

-निजी और सरकारी दोनों ही स्कूलों में छात्र महफूज नहीं

नईदुनिया पड़ताल

रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

रायपुर में पुलिस व स्कूल प्रशासन सुरक्षा के लाख दावे करे, मगर स्थिति यह है कि कोई भी बाहरी कहीं भी घुस सकता है। घटना होने पर सुरक्षा का रिव्यू करने वाली पुलिस भी स्कूलों की सुरक्षा का मुददा शायद भूल गई है। गुरूग्राम स्कूल की घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने अब स्कूलों में छात्रों की सुरक्षा और प्रबंधन की जबावदेही तय की तो रायपुर के जिम्मेदार होश में आए हैं।

नईदुनिया ने रायपुर के करीब 3 हजार स्कूलों की जानकारी हासिल की तो पाया कि सिर्फ 300 स्कूलों में ही सुरक्षा के लिए उपाय हैं। इन स्कूलों में 6 लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। इनमें 5 लाख की सुरक्षा भगवान भरोसे हैं। शेष स्कूलों में न ही शिकायत पेटियां हैं और न सीसीटीवी कैमरे हैं। अगर कोई अजनबी स्कूूल में घुसा तो उसे रोकने-टोकने वाला भी कोई नहीं है।

रायपुर में ये है स्कूलों की तस्वीर

833 प्राइवेट स्कूल, 56 सीबीएसई, 04 आईसीएसई स्कूल और सरकारी समेत 3000 स्कूल

70 फीसदी असुरक्षित, 20 फीसदी थोड़ी सुरक्षा, 10 फीसदी ज्यादातर सुरक्षित

ऐसी मिली अव्यवस्थाएं

केस 01

मिली खुली पेटी

राजधानी के दानी गर्ल्स स्कूल में सुरक्षा और छात्रों की गोपनीय शिकायत सुनने के लिए शिकायत पेटी लगी है। लेकिन इसका आधा भाग खुला हुआ है। किसी भी सरकारी हायर सेकंडरी स्कूल में कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं । चाहे तो प्रोफेसर जेएन पाण्डेय स्कूल हो या फिर सप्रे शाला या फिर हिन्दू हाई पब्लिक स्कूल ही क्यों न हो।

केस 02

छात्र सीधे सड़क पर

सिविल लाइन स्थित होली हार्ट स्कूल स्कूल में छात्र बाहर रोड पर ही सीधे निकलते हैं। इसलिए बाहर अजनबी भी खड़े रहते हैं। ऐसे में छात्रों की असुरक्षा बढ़ जाती है। होलीक्रास बैरन बाजार में भी छात्र सीधे बाहर निकलते हैं। कुछ देर तक छात्र बाहर पालकों का सड़क पर ही इंतजार करते हैं।

स्कूलों में ये मानक होना जरूरी

- सभी स्कूलों में ऑटो या बस में महिला और पुरुष सहायक होना अनिवार्य है।

- छात्रों को बस स्टॉपेज तक छोड़ने वाले की व्यवस्था हो

- स्कूल के गेट में घुसने पर उनके आने-जाने वालों की एंट्री जरूरी है।

- स्कूल गेट, लैब, लाइब्रेरी, टॉयलेट, ऑडिटोरियम, डाइनिंग हॉल आदि की जगह सीसीटीवी की व्यवस्था जरूरी है।

- हेल्थ ऑफिसर, काउंसलर, कैंटीन ऑफिसर, सेफ्टी ऑफिसर, इलेक्ट्रिीसिटी रिलेटेड रिस्क, डेंजरस मटेरियल आदि की निगरानी जरूरी

- छात्रों के शौचालय जाने पर उनके कक्षा के भीतर आने तक की जिम्मेदारी लेना जरूरी

- छात्र , अभिभावक , ऑटो- बस चालक का पंजीयन, आईडी कार्ड होना जरूरी

इनकी बेहतर पहल

अभिभावकों को भी कार्ड देंगे, हाफ डे लीव नो

केपीएस स्कूल की प्रिंसिपल प्रियंका त्रिपाठी का कहना है सुरक्षा के लिए अभी कार्ययोजना पर काम हो रहा है। अभिभावकों को नोटिस देंगे कि वे बस स्टॉफ तक छात्रों को छोड़ने के लिए आएं। हर स्कूल में हमने सीसीटीवी कैमरे लगा रखे हैं। सभी अभिभावकों को एक कार्ड देंगे। स्टाफ की पूरी पुख्ता व्यवस्था करेंगे। हाफ डे लीव नहीं देंगे।

महिला गार्ड भी लगाएंगे

राजकुमार कॉलेज में सुरक्षा के सारे इंतजाम हैं। यहां आने-जाने वालों की बाकायदा एंट्री होती है। प्रिंसिपल अविनाश सिंह ने बताया कि अब महिला गार्ड भी लगाने की तैयारी कर रहे हैं।

ये हो चुकी घटनाएं

घटना- 01 खुशबू अपहरण

- साल 2012 में तेलीबांधा से बच्ची स्कूल बस से उतरकर घर जा रही थी तभी उसका अपहरण कर लिया गया। मामले में प्रोफेसर कॉलोनी से दो भाई विक्की सिंह और लक्की सिंह पकड़े गए थे। स्कूल के बाहर एक माह की रेकी की थी।

घटना 02- गोंदवारा में अपहरण

साल 2015 में गोंदवारा में सरकारी स्कूल से 8 साल के मासूम बच्चे को दिनदहाड़े अपहरण उसके चचेरे भाई ने ही कर लिया। बच्चे को सोनपैरी गांव ले जाकर छह लाख रुपए की फिरौती मांगी गई थी। फिर आरोपी पकड़े गए थे।

घटना 03- ऑटो वाले ने किया था अनाचार

साल 2016 में एक छात्रा को स्कूल छोड़ने ले जा रहे ऑटो चालक ने छात्रा के साथ अनाचार किया था। बाद में पता चला कि स्कूल को मान्यता ही नहीं मिली थी।

वर्जन

पूरे देश में अभी सुरक्षा की बात हो रही है। ज्यादातर स्कूल सुरक्षा करते हैं। सरकार की भी जिम्मेदारी है कि सुरक्षा की व्यवस्था करें। मन से ही सभी सुरक्षा के लिए काम करें। इसे सुनिश्चित भी करें। - बीडी द्विवेदी, अध्यक्ष, फेडरेशन ऑफ एजुकेशनल सोसायटीज

- सुरक्षा व्यवस्था के लिए मापदंड जारी किया गया है। इन मापदंडों पर स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी। - एएन बंजारा, डीईओ, रायपुर।

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12 संदीप 02 समय 8ः40 बजे संजीव