रायपुर (राज्य ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ में सरकार ने सोलर प्लांट को बिजली ग्रिड से जोड़ने की योजना को हरी झंडी दे दी है। इससे अतिरिक्त बिजली का नुकसान नहीं होगा, वह सीधे ग्रिड में चली जाएगी। कार्यदायी विभाग छत्तीसगढ़ अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) ने मोर छत, मोर बिजली योजना में 300 सरकारी भवनों का चयन किया है। इन इमारतों पर सोलर सिस्टम लग जाने के बाद संबंधित विभागों को बिजली बिल सिर्फ एक तिहाई रह जाएगा।

वहीं, बची बिजली ग्रिड में जाने पर उसको एडजस्ट किया जाएगा। ग्रिड में जाने वाली बिजली को जिस पार्टी को बेचा जाएगा, उससे बिजली कंपनी पैसा वसूल कर वह वेंडर को देगी। मध्यप्रदेश के बाद छत्तीसगढ़ देश का दूसरा राज्य होगा, जहां यह योजना प्रारंभ की जा रही है। वेंडरों की विश्वसनीयता के लिए डिस्कॉम की भी मदद ली जाएगी।

सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 50 मेगावॉट के सौर संयंत्र की स्थापना का लक्ष्य रखा है। क्रेडा के प्रस्ताव के अनुसार छत्तीसगढ राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा सोलर रूफ-टॉप रेग्युलेशन नियम में संशोधन कर नेट मीटरिंग रेग्यूलेशन लागू किया गया है। रेग्यूलेशन के अनुसार अब एक किलोवॉट से एक मेगावॉट क्षमता के ग्रिड कनेक्टेड सौर संयंत्र स्थापित कर हितग्राही उत्पादित विद्युत का स्वयं उपभोग कर सकेगा।

ग्रिड में प्रवाहित विद्युत का नेट मीटरिंग के माध्यम से विद्युत देयक में समायोजित होगा। इससे पहले ग्रिड कनेक्टेड रेग्युलेशन के तहत 10 किलोवॉट से अधिक क्षमता के संयंत्र ही पात्र थे। ग्रिड में प्रवाहित विद्युत का समायोजन नियामक आयोग द्वारा निर्धारित लेवलाइज्ड टैरिफ का 50 प्रतिशत की दर से किया जाता था, जिससे हितग्राही को समुचित लाभ प्राप्त नहीं होता था।

सात दिन में मिल जाएगी मंजूरी

सोलर रूफ-टॉप संयंत्र स्थापना की अनुमति एवं ग्रिड संयोजन के लिए छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी की वेबसाइट में आवेदन करना होगा। विद्युत मंडल द्वारा सात दिवस के भीतर तकनीकी मंजूरी प्रदान की जाएगी। संयंत्र स्थापना के बाद 15 दिवस के भीतर विद्युत मंडल द्वारा सौर संयंत्र का निरीक्षण कर ग्रिड संयोजन किया जाएगा। ग्रिड संयोजन के लिए हितग्राही को अब किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं देना होगा। क्रेडा के द्वारा अभी तक लगभग 45 मेगावॉट कुल क्षमता के रूफटॉप सोलर पॉवर प्लांट की स्थापना की जा चुकी है।