रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

भगवान श्रीराम के भक्त हनुमानजी का जन्मोत्सव चैत्र पूर्णिमा शुक्रवार 19 अप्रैल को श्रद्धा-उल्लास के साथ मनाया जाएगा॥ मंदिरों में सुबह हनुमान प्रतिमा का चमेली के तेल, सिंदूर, चांदी के बर्क से श्रृंगार किया जाएगा। कहीं बूंदी का सवामणि प्रसाद तो कहीं लड्डुओं का भोग लगेगा। विविध मंदिरों में जोर-शोर से तैयारियां शुरू हो चुकी है। पुरानी बस्ती के बावली वाले हनुमान मंदिर, रेलवे स्टेशन, गुढ़ियारी के मच्छी तालाब, दूधाधारी मठ, ब्राह्मण पारा, तात्यापारा, महादेवघाट, बूढ़ेश्वर मंदिर के समीप हनुमान मंदिर, छोकरा नाला स्थित सालासर हनुमान मंदिर समेत अनेक मंदिरों में सुंदर कांड और हनुमान चालीसा की चौपाइयां गूंजेगी। कई मंदिरों से शोभायात्रा भी निकाली जाएगी। जगह-जगह भंडारे में प्रसाद वितरण किया जाएगा।

रावतपुरा सरकार आश्रम में अखण्ड हनुमान चालीसा

धनेली स्थित श्रीरावतपुरा सरकार आश्रम में 18 अप्रैल को सुबह 10 बजे अखंड सुंदर कांड पाठ शुरू होकर 19 अप्रैल तक चलेगा। हनुमान जयंती पर ब्रह्म मुहूर्त में हनुमानजी महाभिषेक, सिंदूर, चोला अर्पण के बाद महाआरती होगी। शाम को भंडारे में प्रसाद वितरण होगा। मंदिर को मनमोहक फूलों, गुब्बारों से सजाया जा रहा है। आसपास के गांवों से हजारों भक्त दर्शन करने पहुंचेंगे।

चैत्र और कार्तिक माह में मनाते हैं जन्मोत्सव

सुरेश्वर महादेव पीठ के स्वामी राजेश्वरानंद के अनुसार 18 अप्रैल की शाम 5.25 बजे पूर्णिमा तिथि शुरू होकर 19 अप्रैल को शाम 4.40 बजे तक रहेगी। वैसे तो हनुमान जयंती दो तिथि पर मनाई जाती है। पहली चैत्र माह की पूर्णिमा और दूसरी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। मुख्य रूप से चैत्र पूर्णिमा को ह

ऐसे करें पूजा और व्रत

हनुमानजी का व्रत रखने वाले भक्तगण व्रत की पूर्व रात्रि में ब्रह्मचर्य का पालन करें। जमीन पर सोएं, ब्रह्म मुहूर्त में उठकर प्रभु श्रीराम, माता सीता एवं हनुमानजी का स्मरण करें। स्नान करके विधि पूर्वक पूजा आरती उतारें। हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, सुंदरकांड का पाठ करें। प्रसाद के रूप में भीगे हुए चने या बेसन के लड्डू रखें। पूजा सामग्री में गेंदा गुलाब, कनेर, सूरजमुखी के लाल या पीले फूल, सिंदूर, केसर चंदन, अगरबत्ती, चमेली का दीप इस्तेमाल करें। सिंदूर का चोला चढ़ाएं।