रायपुर। बुधवार को विधानसभा में पेश सीएजी की रिपोर्ट में राज्य सरकार की कई वित्तीय गड़बड़ियां सामने आई है। नवीन पेंशन योजना 2006 में शुरू हुई। यह योजना 2004 के बाद भर्ती कर्मचारियों के लिए थी। योजना में सरकारी कर्मचारियों को अपने वेतन का 10 फीसद और राज्य सरकार को उतना ही अंशदान देना है।

2004 से फरवरी 2006 तक बकाया अंशदान की कटौती के साथ योजना शुरू की गई है। 2006 से 2017 तक कर्मचारियों के अंशदान 1318.68 करोड़ रुपये के सापेक्ष राज्य शासन ने 1294.70 करोड़ बकाया जमा किया जो 23.98 करोड़ कम था।

राज्य शासन ने एनएसडीएल, ट्रस्टी बैंक को निधि के देरी हस्तांतरण पर ग्राहकों देने वाले ब्याज की गणना नहीं की। इसके साथ ही वर्ष 2016-2017 के दौरान राज्य शासन 305.91 करोड़ के कर्मचारी अंशदान के विरूद्ध 301.27 करोड़ का अंशदान किया जिसके परिणास्वरूप 4.64 करोड़ का कम अंशदान तथा राजस्व में वृद्धि और रोजकोषीय घाटा कम प्रदर्शित हुआ है। इस मामले में कैग ने लापरवाही करने वाले अफसरों पर कार्रवाई करने की अनुशंसा की है।

शुगर फैक्ट्री का 29.58 करोड़ बकाया

छग शासन ने वर्ष 2005 -06 से 2008-09 में शुगर फैक्ट्री निर्माण के लिए बालोद स्थित दंतेश्वरी मैय्या सहकारी कारखाना (डीएमसीएसएम) को ब्याज पर 21.83 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की थी। शर्त के अनुसार कंपनी को ऋण वितरण के एक वर्ष बाद शुरू होने वाली किश्त की वसूली के साथ आठ बराबर वार्षिक किश्त में ब्याज के साथ वापस करना था, लेकिन लेखा परीक्षण के दौरान पाया गया कि डीएमसीएसएम के काम में नुकसान होने के कारण ऋण की वसूली की किश्त प्रारंभ नहीं की जा सकी। 31 मार्च 2017 तक 100.44 करोड़ के बदले 84.77 करोड़ मूलधन का 74.07 करोड़ का ब्याज 10.67 करोड़ की वसूली नहीं हो पाई है। कंपनी से केवल 55 करोड़ बरामद हुआ है। वर्तमान में 29.58 करोड़ बकाया है।

कैग रिपोर्ट की कराई जाएगी जांच- मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि कैग की रिपोर्ट लोक लेखा समिति में पेश की जाएगी, जहां उसका परीक्षण किया जाएगा। कैग ने जिन बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज कराई है, उसकी जांच के बाद संबंधित विभाग को भेजा जाएगा। राज्य की वित्तीय स्थिति कमजोर नहीं है।