संदीप तिवारी, रायपुर। जापान में कहानी सुनाकर कमीशीबाई से बच्चों को पढ़ाने का फार्मूला छत्तीसगढ़ के स्कूलों में भी लागू किया जा रहा है। राजीव शिक्षा मिशन ने स्कूलों में इस प्रक्रिया से पढ़ाने के लिए कहा है। जनवरी में स्कूल शिक्षा मंत्री केदार कश्यप और स्कूल शिक्षा प्रमुख सचिव विकासशील ने जापान दौरे के बाद अफसरों को अपनी सिफारिश भेजी है। कमीशीबाई से कक्षा के भीतर और बाहर भी इस्तेमाल करके बच्चों को पढ़ाया जा सकता है।

इंटरनेट पर सामग्री खोजने कहा शिक्षक से

मिशन ने शिक्षकों के लिए पढ़ने-पढ़ाने के तरीकों को बयां करने वाले माशिमं को इस फार्मूले पर इंटरनेट पर सामग्री खोजने को कहा गया है। इसके लिए सुझाव दिया गया है कि गत्ते के बॉक्स या लकड़ी के डिब्बे से कमीशीबाई बनाई जाए।

स्थानीय कहानियों के सचित्र सेट तैयार करके उन्हें स्कूल में इस्तेमाल करें। शिक्षक खुद उसी तरह के हाव-भाव के साथ कहानी सुनाएं। बच्चों को प्रश्न पूछने, चर्चा में शामिल होने का पूरा अवसर दें।

कमीशीबाई के हैं कई फायदे

अफसरों के मुताबिक जापानी शिक्षा के अध्ययन में आश्चर्यजनक बातें सामने आईं। जापान तकनीकी रूप से विकसित होने के बाद भी वहां के शिक्षक अधिकतम ब्लैक बोर्ड और चाक का इस्तेमाल करके बच्चों को पढ़ाते हैं। कमीशीबाई तकनीक से बच्चे बेहतर सीखते हैं। उनका सर्वांगीण विकास होता है। यहां श्यामपट दीवारों में बड़े आकार के होते हैं।

पेपर थियेटर आर्ट है कमीशीबाई

कमीशीबाई पेपर थिएटर आर्ट है। इसमें कहानियों के कार्ड्स होते हैं। कबाड़ से जुगाड़ करके कार्ड्स बना सकते हैं। इसे टीवी जैसे बोर्ड के भीतर रखकर बारीबारी से निकालकर कार्ड में दिए चित्र या हावभाव के साथ कहानी सुनाई जाती है।

- जापान दौरे के अध्ययन के बाद रिपोर्ट बनाने के लिए कहा गया है। प्रारंभिक तौर पर जिसका प्रयोग किया जा सकता है, उसे मिशन के चर्चा पत्र में अकादमिक विकास के लिए शामिल किया गया है। - विकास शील,प्रमुख सचिव, स्कूल शिक्षा