रायपुर। सीडी प्रकरण में बीते 60 दिन से केंद्रीय जेल में बंद दिल्ली के पत्रकार विनोद वर्मा को गुरुवार शाम जेल से रिहा कर दिया गया। सीबीआई कोर्ट ने वर्मा को 1 लाख रुपए के मुचलके पर जमानत दी है, लेकिन वर्मा को महीने में 2 बार सीबीआई दफ्तर में हाजिरी लगानी होगी।

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जेल से रिहाई के वक्त वर्मा के साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल और कांग्रेस के कई नेता मौजूद रहे। सीडी सामने आने के बाद एसआईटी गठित की गई, लेकिन मामला तूल पकड़ा और चौतरफा विरोध के बाद राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से सीबीआई जांच की अनुशंसा कर दी। करीब 15 दिनों से सीबीआई इस प्रकरण में जांच कर रही है। वर्मा से जेल में सीबीआई ने पूछताछ की, लेकिन तय समय सीमा 60 दिन में चालान पेश नहीं कर पाने का लाभ वर्मा को मिल गया।

जेल से रिहाई के बाद वर्मा ने कहा- मैंने सिर्फ पत्रकारिता की, कांग्रेस ट्रेनिंग कैंप में हिस्सा लिया, क्या ये गुनाह है? बता दें कि इस प्रकरण में हैदराबाद जांच के लिए भेजी गई सीडी की रिपोर्ट अब तक नहीं आई है। हालांकि सीडी सार्वजनिक होने के कुछ ही घंटे बाद एक और सीडी सामने आई, जिसमें बताया गया कि मंत्री की जगह कोई और शख्स है, मंत्री के चेहरे का इसमें इस्तेमाल किया गया है।

कांग्रेस की नैतिक जीत : सिंहदेव

नेता-प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने पत्रकार विनोद वर्मा को जमानत मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यह कांग्रेस की नैतिक जीत है। तथाकथित जांच एजेंसी निर्धारित समय के भीतर न्यायालय में चार्जशीट ही पेश नहीं कर पाई। यह इस बात की पुष्टि करता है कि सरकार के पास कोई सबूत या गवाहन नहीं है। यह पूरा केश राजनीतिक षड्यंत्र मात्र है। सिंहदेव का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई पर शुरू से सवालिया निशान लगते रहा, लेकिन हमें न्याय प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है। वर्मा षड्यंत्र का शिकार हुए हैं, इससे उनकी छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। सिंहदेव का कहना है कि उन्हें विश्वास है कि निकट भविष्य में वर्मा इस केस में जीत हासिल कर अपनी प्रतिष्ठा को फि‍र से स्‍थापित कर सकेंगे। सिंहदेव का कहना है कि भाजपा सरकार पत्रकारों के खिलाफ दमनकारी रवैया अपनाए हुए है, इसे कांग्रेस अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन मानती है और पूरजोर विरोध करती है।

राजनीतिक दबाव में कार्रवाई हुई : भूपेश

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल का कहना है कि हमें न्याय प्रक्रिया पर भरोसा है। आगे भी पत्रकार विनोद वर्मा को न्याय मिलेगा। भूपेश का कहना है कि एफआईआर में विनोद वर्मा का नाम नहीं है, आका कौन है यह पता नहीं, किस नम्बर से प्रकाश बजाज को धमकीभरा कॉल गया पता नहीं, किसने कितनी राशि मांगी इसका कोई प्रमाण नहीं, सर्च वारंट के बिना विनोद वर्मा के घर में पुलिस बलात घुसी, पुलिस ने बिना पंचनामा के सीडी की जब्ती बताई, कोर्ट में पुलिस कोई ठोस साक्ष्य या गवाह पेश नहीं कर पाई। पुलिस की कार्यप्रणाली का पालन नहीं हुआ। इससे साफ है कि पुलिस की कार्रवाई राजनीतिक दबाव पर हुई है। कानूनी लड़ाई आगे जारी रहेगी।