रायपुर (संदीप तिवारी)। परीक्षा परिणाम में नंबर गेम से निराश हो रहे छात्र-छात्राओं के लिए छत्तीसगढ़ के आईएएस अधिकारी व कबीरधाम के कलेक्टर अवनीश कुमार शरण ने अपना उदाहरण देकर हताशा से दूर रहने की नसीहत दी है। कबीरधाम कलेक्टर ने फेसबुक पर अपने दसवीं-बारहवीं और बीए के अंकों को शेयर करके कहा कि नंबर कम आने से आपकी सफलता बाधित नहीं होती है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा है कि - इट्स जस्ट्स अ नंबर गेम, आपकी काबिलियत आपको देती है बेहतरीन मौका।

उन्होंने आगे लिखा है कि मैं अपील करता हूं कि वे परिणाम को गंभीरता से न लें। यह एक नंबर गेम है। आपको अपने कैलिबर को साबित करने के कई और मौके मिलेंगे। इतना ही नहीं, कबीरधाम कलेक्टर ने पोस्ट में अपने बायोडाटा में प्राप्त अंकों को भी सार्वजनिक कर दिया है। फेसबुक पर उनकी ओर से शेयर किए गए खुद के बायोडाटा के मुताबिक उन्होंने कक्षा 10वीं में 44.5 फीसद, 12वीं की परीक्षा में 65 और स्नातक में 60.7 फीसद नंबर हासिल किया था।

आत्महत्या के मामले चिंताजनक

कबीरधाम कलेक्टर अवनीश कुमार शरण ने बताया कि रायगढ़ में 18 वर्षीय छात्र ने छत्तीसगढ़ बोर्ड परीक्षा में दोबारा फेल हो जाने के कारण आत्महत्या कर ली थी। इसलिए उन्हें लगा कि यह पोस्ट करना चाहिए। अवनीश कुमार शरण ने कहा कि वर्तमान में अंक आधारित शिक्षा व्यवस्था है इसे ज्ञान आधारित व्यवस्था में बदलना चाहिए। बतादें कि न सिर्फ छत्तीसगढ़ में , बल्कि इसके पहले सीबीएसई परीक्षा में नाकामी पर तेलंगाना में कई छात्रों की आत्महत्या का मामला सामने आ चुका है। इसके बाद से प्राप्तांकों और प्रतिशत से जुड़ा जुनून फिर से राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में है।

बेटी को सरकारी स्कूल में पढ़ाने से आए सुर्खियों में

अपनी बेटी को प्राइमरी स्कूल में पढ़ाने और उसके साथ मिड डे मील खाने को लेकर आइएएस अवनीश कुमार पहले भी सुर्खियों में रहे हैं। बलरामपुर में कलेक्टर रहते हुए अवनीश शरण ने अपनी बेटी वेदिका का दाखिला सरकारी स्कूल प्रज्ञा प्राथमिक विद्यालय में कराया था। वहीं बेटी के साथ मिड डे मील खाते उनकी फोटो काफी वायरल हुई थी। इसके पहले उन्होंने वेदिका को आंगनबाड़ी भी भेजा था। बता दें कि अवनीश कुमार शरण 2009 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। कम अंक के बाद भी अवनीश कुमार शरण ने यूपीएससी परीक्षा पास कर दिखा दिया कि काबिलियत नंबर देखकर नहीं मापी जा सकती।

मूलत: बिहार के हैं अवनीश कुमार शरण

आइएएस अधिकारी अवनीश शरण की जब नियुक्ति हुई थी तब उन्होंने मीडिया से अपना इंटरव्यू में बताया था कि किस तरह वे बिहार के समस्तीपुर जिले के गांव केवटा में बिना बिजली के अपनी पढ़ाई पूरी की। उनकी पढ़ाई लालटेन की रोशनी में हुई है। हालांकि अवनीश क पिता और दादाजी भी शिक्षक थे।