रायपुर। छत्तीसगढ़ में भाजपा अपने 10 मौजूदा सांसदों में से एक को भी टिकट नहीं देगी। इतना ही नहीं, पिछले चुनाव में हारी हुई दुर्ग लोकसभा सीट से भी नए प्रत्याशी को मैदान में उतारेगी।

प्रत्याशी चयन के लिए मंगलवार को दिल्ली में केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) की बैठक हुई। इस दौरान छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी और पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अनिल जैन ने राज्य की सभी 11 सीटों पर चेहरे बदलने का प्रस्ताव रखा। मीडिया से चर्चा करते हुए जैन ने ही बताया कि उनके इस प्रस्ताव पर सीईसी से भी सहमति मिल गई है।

प्रत्याशी चयन में पिछड़ गई है भाजपा

प्रत्याशी चयन के मामले में छत्तीसगढ़ में भाजपा कांग्रेस और बसपा दोनों से ही पिछड़ गई है। कांग्रेस ने शनिवार की रात को पहले और दूसरे चरण की एक-एक समेत राज्य की आरक्षित सभी पांचों सीटों के लिए प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर दी है। वहीं, बसपा ने भी मंगलवार को अपने छह उम्मीदवारों के नामों का एलान कर दिया है।

सता रहा एंटी इंकम्बेंसी का डर

नवंबर- दिसंबर 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस जबरदस्त मात खा चुकी भाजपा को अब लोकसभा चुनाव में भी एंटी इंकम्बेंसी का डर सता रहा है। इसी वजह से प्रत्याशी चयन को लेकर पार्टी बेहद सतर्क है। कई स्तरों पर विचार मंथन के बाद प्रदेश भाजपा की तरफ से आलाकमान को संभावित नामों की सूची सौंपी गई है। इसमें हर सीट से एक-एक नया नाम है।

एक ही चेहरे बार-बार

छत्तीसगढ़ की कुछ लोकसभा सीटों से पिछले कई चुनाव से एक ही चेहरे चुने जा रहे हैं। इस वजह से भी पार्टी नए चेहरे बदलने का मन बना रही है। रायपुर लोकसभा सीट से रमेश बैस लगातार छह बार चुने जा चुके हैं। रायगढ़ सीट से विष्णुदेव साय लगातार चौथी बार संसद पहुंचे हैं। जांजगीर से कमला देवी व महासमुंद से चंदूलाल दूसरी बार के सांसद हैं।

प्रदर्शन दोहराना सबसे बड़ी चुनौती

छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद से भाजपा यहां की 11 में से 10 लोकसभा सीटें हर बार जीत रही है। तीनों चुनाव में भाजपा के 10-10 सांसद लोकसभा पहुंचे। ऐसे में इस बार भी पार्टी के सामने वही प्रदर्शन दोहराने की चुनौती है।