रायपुर। भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति द्वारा मौजूदा सांसदों को इस बार लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं देने की खबरें चल रही हैं। इन सबके बीच पार्टी के सांसदों और उनके समर्थकों में खलबली मची है। सांसद रमेश बैस के समर्थक भी पार्टी के इस निर्णय से नाराज बताए जा रहे हैं।

रायपुर के सात बार के भाजपा सांसद रमेश बैस ने पहला चुनाव हाईकोर्ट के फैसले के आधार पर जीता था। हालांकि एक बार विजय हासिल करने के बाद बैस फिर कभी नहीं हारे और अब रायपुर के सांसद हैं।

रमेश बैस के भाई डॉ.रामजी बैस आरएसएस के नगर संचालक थे। 1978 में रमेश बैस ने पार्षद का चुनाव जीता था। 1980 के विधानसभा चुनाव में तत्कालीन मध्यप्रदेश में भाजपा सिर्फ चार सीटों पर जीत पाई थी। बैस मंदिर हसौद से जीते थे। उनके साथ जीते अन्य सभी विधायक आरक्षित सीटों से जीते थे जबकि बैस सामान्य सीट से।

इससे उनका कद भाजपा में बढ़ा। 1984 में कुशाभाऊ ठाकरे के कहने पर उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ा पर हार गए। 1991 में वे कांग्रेस के विद्याचरण शुक्ल से 985 वोटों से हारे थे। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। कोर्ट ने विद्याचरण के चुनाव को अवैध घोषित कर दिया और बैस विजयी हुए। कोर्ट से एक बार जीतने के बाद बैस लगातार जीत रहे हैं। वे अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में इस्पात और खनन राज्य मंत्री भी रहे।