रायपुर। छत्तीसगढ़ में सत्ता की चौथी पारी के लिए भाजपा के सामने सबसे बड़ा संकट है कि कार्यकर्ता सक्रिय नहीं हो पा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से लेकर संगठन के बड़े नेताओं की बैठक में बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की चिंता साफ नजर आ रही है।

राजनीतिक प्रेक्षकों की मानें तो पिछले 15 साल से सत्ता में रही भाजपा में कार्यकर्ताओं से बड़ी नेताओं की फौज खड़ी हो गई है। 15 वर्ष से सत्ता में काबिज भाजपा के करीब एक हजार कार्यकर्ता अब बड़े नेता बन गये हैं। इनमें से कुछ तो विधानसभा की टिकट पाकर नेता बने हैं तो बहुत स्थानीय निकाय का चुनाव लड़कर। बाकी 50 से अधिक निगम-मंडल समेत अन्य सरकारी पदों पाकर माननीय बन गए हैं।

बढ़ रहा असंतोष का स्तर

भाजपा के आला नेताओं की मानें तो संगठन में भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी मिली। इससे न केवल कार्यकर्ता कम हो गए, बल्कि उनकी महत्वकांक्षा के साथ असंतोष का स्तर भी बढ़ गया है। इसका असर अब बूथ मैनेजमेंट पर पड़ रहा है। इससे भाजपा संगठन के पुराने नेता भी चिंतित हैं।

पिछले तीन चुनाव में कार्यकर्ता प्रमोट होकर नेता बन गये और अपेक्षानुस्र्प नए कार्यकर्ता बने नहीं। कई जगह पर जमीनी रिपोर्ट हवा में तैयार कर दी गई। यही कारण है कि भाजपा के राष्ट्रीय सहसंगठन महामंत्री सौदान सिंह को अपनी सभी बैठकों में यह कहना पड़ रहा है कि कार्यकर्ताओं की चिंता करो।

प्रत्याशी के लिए गुप्त मतदान

भाजपा में अब नेताओं की संख्या बढ़ने का असर टिकट के दावेदारों पर भी नजर आ रहा है। वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में एक-एक सीट पर कार्यकर्ताओं को खोज-खोजकर टिकट देने वाली भाजपा में इस चुनाव में हर सीट पर पांच से दस दावेदार सामने आ रहे हैं। इसी वजह से प्रत्याशी चयन के लिए इस बार पार्टी को गुप्त मतदान का सहारा लेना पड़ रहा है।