रायपुर। चुनाव आते ही राजनीतिक दलों ने वादों क झुनझुना बजाना शुरू कर दिया है। छत्तीसगढ़ में अन्न्दाताओं की संख्या अधिक है। कुल आबादी का 70 फीसद हिस्सा खेती से जुड़ा है। इसलिए हर दल के पिटारे में इनके लिए कुछ न कुछ खास वादा है। वादों का यह झुनझुना चुनाव के बाद बजेगा या नहीं यह तो वक्त ही बताएगा।

चुनावी साल में किसान भी दबाव बनाने में पीछे नहीं रहे। पिछले कई महीनों से अलग-अलग जगहों पर लगातार किसान आंदोलन होते रहे हैं। हाल ही में राजनांदगांव में किसानों ने महापंचायत बुलाई और मुख्यमंत्री के लिए सजा का एलान कर दिया। इससे पहले बस्तर से किसान पदयात्रा कर राजधानी पहुंचे और अपनी ताकत का अहसास कराया। सरकार और विपक्ष दोनों को पता है कि अगर चुनाव में विजय हासिल करनी है तो किसानों का समर्थन जरूरी होगा।


धान के कटोरे में बोनस पर सियासत

छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। राज्य सरकार किसानों का धान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदती है। इस पर राज्य अपनी ओर से तीन सौ रूपये प्रति क्विंटल बोनस दे रही है। यानी धान की कीमत होगी 2070 रूपये प्रति क्विंटल। इस बार समर्थन मूल्य और बोनस की राशि एक साथ दी जाएगी। इतना ही नहीं इस बार मक्का भी समर्थन मूल्य पर खरीदने की तैयारी है।


किसान संतुष्ट नहीं

छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन के प्रदेश संयोजक राजकुमार गुप्त ने कहा-फ्लैट रेट पर बिजली का बिल देने से हमें साल भर का भुगतान करना होगा जबकि पंप तो एक-दो महीने ही चलता है। समर्थन मूल्य बढ़ाने से भी किसानों को खास फायदा नहीं हो रहा है। इससे तो लागत भी नहीं निकल रही है।


कांग्रेस कह रही कर्ज माफ, बिजली हाफ

कांग्रेस किसानों का कर्ज माफ करने की बात कह रही है। इसके अलावा बिजली हाफ का नारा भी दे रही है। वहीं, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ ढाई हजार रूपये क्विंटल तो आम आदमी पार्टी 26 सौ रूपए प्रति क्विंटल के हिसाब से धान खरीदी करने की बात कर रही है।