रायपुर। आईएएस की नौकरी छोड़कर भाजपा नेता बने ओपी चौधरी की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अभी जमीन घोटाले में मचा शोर थमा भी नहीं है कि दूसरे घोटालों की चर्चा भी होने लगी है। इस बीच राज्य सरकार के एक अनौपचारिक आदेश ने ओपी को और परेशान कर दिया है। बताया गया है कि मंत्रालय से अधिकारियों ने फोन करके संबंधित जिला प्रशासन को इत्तला दी है कि सरकारी वेबसाइटों में से ओपी चौधरी का नाम हटा दिया जाए।

रायपुर जिला प्रशासन की वेबसाइट में तो ओपी चौधरी अब भी कलेक्टर के रूप में दर्ज हैं। दंतेवाड़ा के पूर्व कलेक्टर के तौर पर उनका उल्लेख है। इतना ही नहीं जावंगा के एजुकेशन हब समेत दूसरी संस्थाओं में भी उनके नाम का उल्लेख है।

एक कलेक्टर ने यह माना कि सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से उनके नाम का गुणगान बंद करने और वेबसाइट से उनका नाम हटाने को कहा गया है, हालांकि इस संबंध में कोई लिखित आदेश नहीं जारी किया गया है। यह भी बताया गया है कि उनके नाम को विलोपित करने के इस आदेश का उनके दंतेवाड़ा जमीन घोटाले में फंसने से कोई संबंध नहीं है। यह आदेश तो पहले ही आ चुका था।

ओपी चौधरी वर्तमान में खरसिया विधानसभा क्षेत्र में पदयात्रा कर रहे हैं। उनकी इस पदयात्रा को चुनावी तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। दंतेवाड़ा में भी उनके समर्थकों ने भाजपा नेता के तौर पर उनके फ्लैक्स लगाए हैं। अभी चौधरी नेता के रूप में अपनी दूसरी पारी ठीक से शुरू भी नहीं कर पाए हैं कि आम आदमी पार्टी ने आइएएस रहते हुए उन्होंने जो फैसले लिए थे उस पर सवाल खड़ा कर दिया।

बताया जा रहा है कि ओपी के नेता बनने के बाद आइएएस के तौर पर किए गए उनके काम का गुणगान करने में चुनाव आयोग दिक्कत खड़ी कर सकता है। इसीलिए सरकारी वेबसाइटों से उनके नाम को विलोपित करने की तैयारी की जा रही है।

दूसरे खुलासे करने की तैयारी में आप

ओपी चौधरी को लेकर आम आदमी पार्टी अभी और भी खुलासे करने की तैयारी कर रही है। आप नेताओं ने दंतेवाड़ा में जमीन घोटाले के दस्तावेज पेश करने के बाद अब दूसरे दस्तावेजों के होने का दावा भी किया है। बताया जा रहा है कि शिक्षा के क्षेत्र में दंतेवाड़ा में उन्होंने काम भले ही बड़ा किया है, घोटाले भी जमकर किए हैं। भूमि और आवासीय कालोनी में गड़बड़ी की बात भी कही जा रही है।