रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

प्रदेश में गर्मी बढ़ते ही नलकूप, बोरवेल और तालाबों का जलस्तर घट गया है। राजधानी से सटे गांवों के किसानों को मवेशियों को नहलाने, खेत तक पानी पहुंचाने, साग-सब्जियों की सिंचाई के लिए दिक्कत हो रही है। ग्रामीण पानी की मांग कर रहे हैं। स्थिति को देखते हुए मोटर पंप, बोरवेल से पानी का दोहन कर रहे लोगों पर निगम, जिला पंचायत विभाग नजर रख रहे हैं। दूसरी तरफ छग राज्य जल एवं स्वच्छता सहायक संगठन के तहत बोरवेल की योजनाओं के बजाय सरफेस योजना पर फोकस किया जा रहा है। इसके माध्यम से गांवों में पानी सप्लाई की तैयारी है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार चुनाव आचार संहिता हटते ही कई लंबित पड़ी योजनाओं पर तेजी से कार्य किया जाएगा। इसके अनुसार बोरवेल से सिर्फ कुछ लोगों और गांवों को पानी मिल सकता है। इसका भी जल स्तर डाउन होने पर सरफेस के भरोसे कई गांवों को पानी की आपूर्ति करना होता है, इसलिए जरूरत पड़ने या विभागीय निर्देश पर ही बोरवेल होगा, अन्यथा इंटेकवेल तैयार करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

पानी टंकी तैयार होगी

गांव में किसानों को पानी पहुंचाने के लिए नदियों के माध्यम से एमडीआर तक पानी की सप्लाई होती है। इसके बाद विभिन्न गांवों में तैयार पानी टंकियों से लोगों तक पानी सप्लाई होगी। हालांकि आचार संहिता लगने से अभी बोरवेल, बड़ी पानी टंकियों के निर्माण को लेकर कोई नई योजना नहीं शुरू हुई है। उम्मीद है कि लोकसभा चुनाव के बाद बजट में शामिल विभागीय योजना पर कार्य शुरू होगा। ज्ञात हो कि जनपद पंचायत-अभनपुर, छछानपैरी, धमतरी, सेजबहार, बकतरा, परसदा, गातापार आदि गांवों के किसानों ने जल विभाग में पानी छोड़ने के लिए आवेदन दिया था।