रायपुर। पचपेड़ी नाका स्थित एक निजी अस्पताल में बड़ी संख्या में मोतियाबिंद के मरीजों को जमीन पर लेटाने का मामला गुरुवार को देर रात को सामने आया। इससे संबंधित दो वीडियो वायरल हुए, जिसके बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया। आयुष्मान भारत योजना की स्टेट नोडल एजेंसी ने जिला अफसरों को मौके पर भेजा। इसकी रिपोर्ट तलब की है।

इस योजना के तहत अनुबंधित रेलीगेयर बीमा कंपनी भी इसी दौरान ऑडिट के लिए मौके पर पहुंची हुई थी। सूत्र बताते हैं कि बीमा कंपनी और अस्पताल के संचालक, डॉक्टर्स के बीच जमकर विवाद हुआ। मिली जानकारी के मुताबिक जिन्हें जमीन पर लेटाया गया उनमें कई मरीज हैं और कुछ ऐसे हैं जिनका ऑपरेशन शुक्रवार को होने वाला है। वीडियो वायरल होने के बाद देर रात सभी मरीजों को तत्काल अलग-अलग वार्ड में शिफ्ट कर बेड मुहैया करवाया गया।

अस्पताल प्रबंधन का आरोप है कि बीमा कंपनी दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। उसके अधिकारी सुबह से जांच कर रहे हैं। परेशान कर रहे हैं, ताकि हम ऑपरेशन न करें, जिससे क्लेम नहीं होंगे। अगर क्लेम नहीं होंगे तो कंपनी को भुगतान नहीं करना पड़ेगा। गौरतलब है कि आयुष्मान योजना पर विवाद इसकी लॉचिंग तारीख 16 सितंबर से चल रहा है। लेकिन सच्चाई यह भी है कि मोतियाबिंद सर्जरी में गड़बड़ी की शिकायतें आती रही हैं।

डॉक्टर ने मीडिया को रोका- मामले का कवरेज करने पहुंचे मीडिया कर्मियों के साथ डॉक्टर्स ने बदसलूकी की। अपशब्दों का इस्तेमाल किया। इस दौरान मरीजों से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन यहां हुए विवाद से ये डर गए। सभी ग्रामीण क्षेत्र से लाए गए हैं।

- बीमा कंपनी रेलीगेयर अस्पताल पर दबाव बनाना चाहती है और अफसर उनका साथ दे रहे हैं। किसी भी मरीज को जमीन पर नहीं लेटाया गया। हम सभी मापदंडों का पालन कर रहे हैं। रेलीगेयर वाले परेशान करने के लिए ही आते हैं। - डॉ. विनय जायसवाल, संचालक, गणेश विनायक हॉस्पिटल

इंश्योरेंस कंपनी ऑडिट के लिए गई है, यह रूटीन वेरीफिकेशन है। मुझे भी वीडियो मिला है। वे मरीज हैं या कोई और, मैं उसका वेरीफिकेशन करवा रहा हूं। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। - विजेंद्र कटरे, नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत योजना एवं संजीवनी कोष