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    पुनिया ने राजभवन पर उठाया सवाल, कहा- ईवीएम से चुनाव नहीं होने देंगे

    Published: Sat, 13 Jan 2018 10:48 PM (IST) | Updated: Sun, 14 Jan 2018 07:50 AM (IST)
    By: Editorial Team
    puniya 13 01 2018

    रायपुर। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया ने भू-राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक पर आदिवासी विधायकों को चार दिन बाद मिलने का समय देने पर राजभवन की भूमिका पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में कांग्रेस पूरी कोशिश करेगी कि यहां ईवीएम से विधानसभा चुनाव न हो।

    आदिवासी क्षेत्र अंबिकापुर और सूरजपुर का दौरा कर लौटे पुनिया ने यह भी कहा कि भाजपा के मंत्री और पदाधिकारी बस्तर व सरगुजा में चाहे जितना घूम लें, उनके कारनामे जनता के सामने आ चुके हैं। पुनिया ने कहा कि कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के बीच गुटबाजी की अफवाह फैलाई जाती है, जबकि भाजपा से ज्यादा आज कांग्रेस संगठित हो चुकी है। विस चुनाव में यह पता चल जाएगा।

    न्यू सर्किट हाउस में शनिवार को पुनिया ने पीसीसी अध्यक्ष भूपेश बघेल और प्रदेश प्रभारी सचिव अस्र्ण उरांव के साथ माइक्रो बूथ मैनेजमेंट पर चर्चा की। पुनिया ने 'नईदुनिया" को बताया कि केवल ग्रामीण ही नहीं, शहरी क्षेत्र को भी मजबूत करने की रणनीति बन रही है। पार्षद, चुनाव हारे प्रत्याशियों और पूर्व पाषदों को साथ लेकर चुनावी रणनीति पर काम किया जाएगा।

    पुनिया ने कहा कि गांवों में बिना पूर्व सूचना के आे घंटे में सभा के लिए 300-400 लोगों का जमा होना, यह कांग्रेस की ताकत और संगठन की मजबूती को बताता है। आदिवासी इलाकों में आज भी कांग्रेस मजबूत है, क्योंकि हमेशा पार्टी आदिवासियों के हित की सोचती है। अभी पीसीसी अध्यक्ष भूपेश बघेल और नेता-प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने ध्यान नहीं दिया होता तो आदिवासियों की जमीन छीनने वाले संशोधन विधेयक को भाजपा पास करा चुकी होती। इस असंवैधानिक कृत्य में भाजपा के विधायक भी बराबर के जिम्मेदार हैं, जिन्होंने विधेयक के पक्ष में वोट किया।

    प्रत्याशी चयन के लिए हम खुद सर्वे कर रहे

    पुनिया ने कहा कि टिकट सब मांग सकते हैं। इसमें कोई रोक नहीं है, लेकिन जीतने वाले प्रत्याशी को ही टिकट मिलेगा। इसके लिए वे खुद सर्वे कर रहे हैं। सभी विधायकों से कहा गया है कि उनके पास अभी समय है। कहीं कमी रह गई है, तो उसे मेकअप कर लें।

    विद्याचरण के समाधि स्थल पहुंचे

    पुनिया अचानक कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. शिवकुमार डहरिया और नेता रमेश वर्ल्यानी व गिरिश देवांगन के साथ विद्याचरण शुल्क के समाधि स्थल पहुंचे। कांग्रेस में लंबे समय के बाद विद्याचरण की पूछ परख हुई है। इसके दो कारण हो सकते हैं, पहला विद्याचरण शुक्ल के समर्थकों को साना और दूसरा अजीत जोगी के लोगों को जवाब देना, जो कांग्रेस में विद्याचरण की अनदेखी का आरोप लगा रहे। पुनिया ने कहा कि विद्याचरण देश के नामी नेताओं में से हैं। देश निर्माण में उनका योगदान रहा। पुनिया ने कहा कांग्रेस की सरकार बनने पर विद्याचरण शुक्ल के नाम किसी बड़े संस्थान का नामकरण किया जाएगा।

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