रायपुर। केंद्रीय भू-जल संरक्षण विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक रायपुर में भू-जल स्तर डेढ़ मीटर प्रतिवर्ष के हिसाब से गिर रहा है। यह खतरे की घंटी है। यह स्थिति इसलिए बनी है, क्योंकि बरसात का पानी भूमिगत न होकर नालों के जरिए नदियों, नदियों से समुद्र में जा रहा है। आप और हम मिलकर बरसात की एक-एक बूंद को सहेज सकते हैं। इसके लिए जरूरी है रेन वाटर हार्वेस्टिंग।

अगर आप वाटर हार्वेस्टिंग करवाते हैं तो बरसात का एक लाख लीटर पानी तीन महीने में भूमिगत कर सकते हैं। इससे सालभर पानी की किल्लत नहीं होगी। रायपुर में 2.93 लाख घर हैं। अगर प्रति मकान का औसत क्षेत्रफल दो हजार स्क्वेयर फीट माना जाए तो 20 करोड़ लीटर पानी हम हर बरसात के सीजन में बचा सकते हैं।

आंकड़े गवाह हैं कि शहर में पानी की खपत तेजी से बढ़ रही है। बीते वर्ष तक जहां रोजाना 200 एमएलडी पानी की आश्यकता थी, वह बढ़कर 230 एमएलडी तक जा पहुंची है। इसके अलावा 30 टैंकर रोजाना फेरे लगा रहे हैं।

क्या कहता है नियम-

नियमानुसार 150 वर्ग मीटर यानी 1500 वर्ग फीट जमीन में होने वाले निर्माण के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य है। यह राज्य शासन का नियम है। भवन अनुज्ञा के समय निगम भू-मालिक से 50 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से राशि डिपॉजिट (एफडीआर) करवाई जाती है।

18 मार्च 2019 की स्थिति में निगम के पास करीब 13 करोड़ रुपये डिपॉजिट है। रायपुर नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक 50 फीसद से अधिक भू-स्वामियों ने हार्वेस्टिंग करवाई ही नहीं। ये जमा राशि रिलीज करवाने यानी छुड़ाने आए ही नहीं। सूत्रों के मुताबिक निगम इसे राजसात करने की तैयारी में हैं।

हैंड पंप में नहीं है पानी

न्यू राजेंद्र नगर, अमलीडीह, पचपेड़ी नाका, लालपुर, शिवानंद नगर, राजातालाब, रामसागर पारा, सरोना क्षेत्रों में कई हैंडपंप गर्मी में सूख गए।

केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक

देवपुरी, पचपेड़ी नाका, मोवा, पंडरी, दलदल सिवनी, खमतरई, बिरगांव, मठपुरेना, भाठागांव, टाटीबंध, रावांभाठा, न्यू राजेंद्र नगर, कोटा और प्रोफेसर कॉलोनी क्षेत्र में भू-जल स्तर तेजी से गिर रहा है।

फैक्ट फाइल-

180 से 200 एमएलडी-ठंड, बरसात में पानी की खपत

230 एमएलडी तक गर्मी में पानी की खपत

1.10 लाख निगम क्षेत्र में नल कनेक्शन

विशेषज्ञ की राय-

- नए पुराने सभी मकानों में वाटर हॉर्वेस्टिंग हो सकती है। बस करवाने की सोच होनी चाहिए, इसे समझना होगा। वाटर हार्वेस्टिंग के दो सिस्टम हैं, पहला- अगर घर के आसपास पांच-सात मीटर की दूरी पर बोर है तो वाटर हार्वेस्टिंग का पाइप इसमें जोड़ा सकता है। यह रिचार्ज होता रहेगा। दूसरा- अगर बोर नहीं है तो टेरिस (छत) के स्पेस के आधार पर गड्ढा खोदकर उसमें पाइप उतारे जा सकते हैं। 12-14 हजार रुपये खर्च आता है। जो मुझे नहीं लगता कि बहुत ज्यादा है - विपिन दुबे, भू-जलविद एवं वाटर हार्वेस्टिंग विशेषज्ञ

- सभी पक्के मकान जो 1500 वर्गफीट में बने हैं, उनमें वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य है। पूर्व में निगम के पास काफी राशि जमा है, जिसे भू-मालिक लेने ही नहीं आए। बहुत जल्द नए प्रावधान लागू होंगे। वाटर हार्वेस्टिंग होगी।-बीएल अग्रवाल, नगर निवेशक, नगर निगम रायपुर