रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

उच्च शिक्षा के लिए लोन लेने की सोच रहे लोगों को इस बार थोड़ा झटका लग सकता है। बैंकिंग सूत्रों का कहना है कि एजुकेशन लोन के मामले में सख्ती बरती जा सकती है। आरबीआइ ने बैंकों को निर्देश दिया है कि बैंक पहले अपने एनपीए में सुधार करें और डिफाल्टरों से ऋण वसूली में तेजी लाएं। इसके बाद ही लोन स्वीकृत करने में तेजी दिखाएं। आरबीआइ के आदेश का असर एजुकेशन लोन के साथ ही दूसरे लोन पर भी दिखने लगा है। सूत्रों का कहना है कि लोन की रिकवरी आसान हो इसके लिए बैंक सख्ती के मूड में हैं। बैंकों का पूरा फोकस कारोबार बढ़ाने और रिकवरी पर है। रिकवरी के नए-नए तरीके तलाशे जा रहे है।

अब तक यह है प्रोसेस-

चार लाख तक के एजुकेशन लोन पर गारंटर की आवश्यकता नहीं पड़ती। एजुकेशन लोन की ब्याज दर अन्य लोन की ब्याज दर से कम रहती है। बताया जा रहा है कि एजुकेशन लोन आसानी से स्वीकृत होने के कारण इसमें भी डिफाल्टरों की संख्या बहुत रहती है। हालांकि ये छोटे कर्जदार ही होते हैं।

बैंकिंग प्रबंधन की लगातार हो रही मीटिंग-

कर्जदारों से वसूली के लिए बैंकिंग प्रबंधन की लगातार मीटिंग हो रही है। इसमें फोकस यही रहता है कि रिकवरी कैसे बढ़ाई जाए। बैंकों द्वारा रिकवारी के लिए एक बार फिर कर्जदारों के घरों में प्रदर्शन करने की तैयारी है। पीएनबी सहित कई बैंक कर्ज वसूली के लिए यह तरीका अपना चुके हैं।