रायपुर। स्किल इंडिया के लिए मजाक बन गया है छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल का 28 साल पुराना वोकेशनल कोर्स। मध्यप्रदेश के जमाने से जो पाठ्यक्रम लागू हुआ था, वह आज भी पढ़ाया जा रहा है। मंडल की ओर से न ही ये कोर्स बंद किए गए हैं और न ही कोर्स को आगे बढ़ाने के लिए कोई सुधार किया जा रहा है।

आलम यह है कि वोकेशनल के नाम पर आज भी बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन, रिपेयर ऑफ रेडियो एंड टीवी, मोपेड, स्कूटर रिपेरिंग किताबों के सिलेबस में हैं। सड़कों से स्कूल और घरों से रेडियो व टीवी गायब हो गए हैं, लेकिन माशिमं के सिलेबस में ये अभी भी बरकरार हैं। इसकी वजह ये है कि पिछले सालों में एक बार भी इन कोर्सेस के सिलेबस को नहीं बदला गया है।

नतीजा यह हो रहा है कि अब स्कूलों में खुद ही ये कोर्स बंद होते जा रहे हैं। साल-दर-साल बच्चों की संख्या कम होती जा रही है। राजीव गांधी केंद्र प्रवर्तित योजना के तहत 1990 के दशक में कोर्स लागू किया गया था, तब इनमें छात्रों की संख्या 25 हजार थी, लेकिन 2018 में घटकर यह 1350 पहुंच गई है।

शुरुआती रुझान से अब की तुलना करें तो महज पांच फीसद ही परीक्षार्थी बचे हैं। पिछले पांच सालों में छात्रों की संख्या तीन हजार के आंकड़े को भी पार नहीं कर सकी। 1990 में जब ये वोकेशनल कोर्स लागू किए गए थे, तब पं. सुंदरलाल शर्मा व्यावसायिक संस्थान भोपाल ने इसके लिए कोर्स डिजाइन किया था।

तब से आज तक इन कोर्स में कोई बदलाव नहीं किया गया। माशिमं के अध्यक्ष गौरव द्विवेदी का कहना है कि इन कोर्सेस के सम्बंध में आगे सुधार करें या अन्य कोई निर्णय लिया जाये इस पर विचार किया जाएगा।

इस तरह लगातार घटे छात्र

साल परीक्षार्थी कुल ट्रेड स्कूलों की संख्या

2013-14 1972 20 63

2014-15 2280 19 61

2015-16 2113 20 63

2016-17 2029 19 56

2017-18 1859 20 55

2018-19 1359 20 77

10 से कम बच्चे, फिर भी परीक्षा

मंडल इन ट्रेडों के लिए हर साल परीक्षा भी आयोजित करा रहा है, लेकिन फंड के अभाव में स्कूलों में ये ट्रेड या तो बंद हो रहे हैं या फिर कागजों पर ही चलाए जा रहे हैं। केंद्र की ओर से इन कोर्सेस के लिए अब कोई राशि नहीं मिल रही है।

वहीं समग्र शिक्षा अभियान के तहत नए 546 स्कूलों में टेलीकम्यूनिकेशन, बैंकिंग फाइनेंस, एनिमेशन और मल्टीमीडिया ट्रेड , आइटी , हेल्थ केयर एग्रीकल्चर, ऑटोमोबाइल, रिटेल , ब्यूटी वेलनेस और इलेक्ट्रानिक्स एंड हार्डवेयर स्कूलों में नए ट्रेड लागू हैं। इन कोर्सेस के लिए हर स्कूल में एक ट्रेड के लिए 3 से 5 लाख रुपए फंड देकर लैब स्थापित किया जा रहा है, लेकिन पुराने कोर्स के लिए प्रैक्टिकल कराने तक के लिए फंड नहीं है।

कागज पर आज भी जिंदा हैं ये कोर्स

माशिमं के विद्योचित विभाग में आज भी 29 ट्रेड के कोर्स जिंदा हैं। इनमें गारमेंट मेकिंग, बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन, रिपेयर ऑफ रेडियो एंड टीवी, मोपेड, स्कूटर, मोटरसाइकिल रिपेयर, रिपेयर ऑफ इलेक्ट्रिक डोमेस्टिक एप्लायन्सेस एंड इलेक्ट्रिक मोटर रिवाइंडिंग, डेयरी फॉर्मिंग,एग्रीकल्चर इकोनॉमिक्स एंड फॉर्म मैनेजमेंट, हार्टीकल्चर, पोल्ट्रीफॉर्म, ऑफिस मैनेजमेंट, बुक कीपिंग एंड अकाउंटेंसी, कोऑपरेटिव मैनेजमेंट, स्टेनो टाइपिंग, फ्रूट एंड वेजिटेबल प्रिजरवेशन, बेकरी एंड कंफेक्शनरी, फॉर्म मेकेनिक्स, बैंकिंग असिस्टेंट, स्टोर कीपिंग, फोटाग्राफी, प्रिंटिंग, बाइंडिंग एंड पेपर कटिंग, कम्प्यूटर अप्लीकेशन, वेल्डिंग टेक्नॉलॉजी एंड फेब्रिकेशन, हॉस्पिटल हाउस कीपिंग, लेदर टेक्नॉलॉजी, टेक्सटाइल डिजाइनिंग, वुड गुड्स मेकिंग एंड कार्विंग, एक्स रे तकनीशियन, फैशन डिजाइनिंग एंड गारमेंट मेकिंग ,मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नॉलॉजी, आक्सजीलरी नर्सिंग एंड मिडवाइफयरी अन्य लागू हैं।